गरीबी कोई गुनाह नहीं: कैदी की चिट्ठी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने मानवता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि गरीबी कोई गुनाह नहीं है। जोधपुर स्थित मुख्यपीठ ने एक कैदी द्वारा लिखी गई चिट्ठी को रिट याचिका मानते हुए यह फैसला दिया और पैरोल से जुड़े मामलों में अधिकारियों के यांत्रिक रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोल पर रिहाई के लिए गरीब कैदियों से जमानती की मांग करना संविधान की भावना के विपरीत है। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल इस आधार पर किसी कैदी को पैरोल से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह जमानतदार उपलब्ध कराने में असमर्थ है। गरीबी को अपराध की तरह देखना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह कानून के समानता के सिद्धांत का भी उल्लंघन है।
मामला उस समय सामने आया जब एक गरीब कैदी ने अपनी व्यथा बताते हुए हाईकोर्ट को चिट्ठी लिखी। कैदी ने पत्र में उल्लेख किया कि उसे पैरोल पर रिहा किया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने उससे जमानती की मांग की, जिसे वह आर्थिक रूप से पूरा करने में असमर्थ था। इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे रिट याचिका के रूप में स्वीकार किया और मामले की सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के रवैये पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अधिकारी बिना विवेक का प्रयोग किए नियमों को यांत्रिक तरीके से लागू कर रहे हैं। उन्होंने यह नहीं देखा कि संबंधित कैदी की सामाजिक और आर्थिक स्थिति क्या है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य सुधार और पुनर्वास है, न कि गरीबों को और अधिक दंडित करना।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पैरोल कैदी का अधिकार नहीं, लेकिन यह सुधारात्मक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसे केवल औपचारिकताओं और तकनीकी आधार पर नकारना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पैरोल से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और गरीब कैदियों के साथ भेदभाव न करें।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में इस तरह के मामलों में अधिकारियों द्वारा लापरवाही या असंवेदनशीलता दिखाई गई, तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। साथ ही, जेल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि पैरोल से संबंधित नियमों का पालन करते समय संविधान में निहित समानता और गरिमा के अधिकारों को ध्यान में रखा जाए।
