जेएनवीयू में पोस्टर विवाद गहराया, एनएसयूआई नेता के ‘गांधीवादी’ बयान पर भाजपा का पलटवार
जोधपुर स्थित जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) में सरकारी प्रदर्शनी के पोस्टर फाड़ने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां छात्र संगठनों और प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
मामले में जमानत पर रिहा हुए एनएसयूआई जिलाध्यक्ष ने पोस्टर और बैनर हटाने की घटना को ‘गांधीवादी तरीका’ बताते हुए इसे अहिंसक विरोध का रूप बताया है। उनके इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है।
एनएसयूआई नेता का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार की हिंसा नहीं की, बल्कि केवल अपने विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया। उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना उनका अधिकार है और उन्होंने वही किया।
हालांकि, इस बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इसे गांधीवादी विचारधारा का अपमान बताते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच विश्वविद्यालय परिसर का माहौल भी प्रभावित हुआ है। छात्र संगठनों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस विवाद ने एक बार फिर छात्र राजनीति और विरोध के तरीकों को लेकर बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे अनुशासनहीनता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला माना जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस पर और भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
