जोधपुर में अब कम बारिश में भी खराब नहीं होगी मोठ फसल: एक महीने बिना बरसात हरी-भरी रहेगी; काजरी वैज्ञानिकों ने तैयार की चार नई किस्म
राजस्थान के शुष्क और कम बारिश वाले इलाकों में मोठ की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के वैज्ञानिकों ने मोठ की चार नई किस्में तैयार की हैं। इन किस्मों को ऐसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जहां बारिश कम होती है और लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनी रहती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि नई किस्मों में कम पानी की स्थिति में भी फसल को लंबे समय तक हरी-भरी बनाए रखने की क्षमता होगी।
एक महीने तक कम बारिश का असर कम
काजरी के वैज्ञानिकों के अनुसार, राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में मोठ की खेती मुख्य रूप से मानसून की बारिश पर निर्भर रहती है। कई बार बुवाई के बाद बारिश नहीं होने से पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और किसानों को उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ता है। नई किस्मों को इसी समस्या को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
इन किस्मों में सूखा सहन करने की क्षमता अधिक बताई जा रही है। अगर फसल के दौरान करीब एक महीने तक बारिश नहीं होती है, तब भी पौधों के हरे बने रहने और विकास जारी रखने की संभावना रहेगी। इससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में मोठ की खेती को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है।
पश्चिमी राजस्थान के लिए उपयोगी
मोठ राजस्थान की प्रमुख खरीफ दलहनी फसलों में शामिल है। खासकर जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है। इन इलाकों में बारिश का वितरण असमान रहता है। कई बार थोड़े समय में बारिश होने के बाद लंबे अंतराल तक सूखा पड़ जाता है।
ऐसे में नई किस्में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें स्थानीय जलवायु और कम नमी वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इससे किसानों को बदलते मौसम में फसल बचाने में मदद मिल सकती है।
कम पानी में बेहतर उत्पादन पर जोर
काजरी लंबे समय से शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों के लिए ऐसी कृषि तकनीक और फसल किस्मों पर काम कर रहा है, जिन्हें कम पानी में उगाया जा सके। मोठ की नई किस्में भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं।
वैज्ञानिकों का फोकस ऐसी फसल तैयार करने पर है, जो कम बारिश की स्थिति में भी अपनी बढ़वार बनाए रख सके और किसानों को बेहतर उत्पादन दे। नई किस्मों के खेत स्तर पर प्रदर्शन और किसानों तक इनके बीज पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इनके व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
सूखे की स्थिति में किसानों को मिलेगा फायदा
राजस्थान में मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों के सामने हर साल बारिश को लेकर चुनौती रहती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान में कम बारिश होने पर खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में सूखा सहन करने वाली मोठ की किस्में खेती के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
काजरी के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई चार नई किस्मों से उम्मीद है कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में मोठ की खेती को मजबूती मिलेगी। यदि ये किस्में किसानों के खेतों में अपेक्षित परिणाम देती हैं, तो आने वाले समय में पश्चिमी राजस्थान में मोठ उत्पादन को अधिक स्थिर बनाने में इनकी अहम भूमिका हो सकती है।
