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जोधपुर में जानलेवा हमले के 10 साल पुराने मामले में फैसला, दो आरोपियों को 7-7 साल की कठोर सजा; 1 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया

 
जोधपुर में जानलेवा हमले के 10 साल पुराने मामले में फैसला, दो आरोपियों को 7-7 साल की कठोर सजा; 1 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया

राजस्थान के जोधपुर जिले में ग्राम सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष पर हुए जानलेवा हमले के करीब 10 साल पुराने मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव सिडाना की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी मोटाराम और भंवरू उर्फ भंवरलाल को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर 1 लाख रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फैसला आने के बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने की बात कही है।

10 साल पहले हुआ था जानलेवा हमला

मामला जोधपुर जिले के पांचला खुर्द ग्राम सेवा सहकारी समिति से जुड़ा हुआ है। यहां समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश पर जानलेवा हमला किया गया था। हमले के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए और कोर्ट में चालान पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में चलती रही।

कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर फैसला

अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपियों को दोषी माना और उन्हें सजा सुनाई।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव सिडाना ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को कठोर कारावास की सजा दी। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया गया।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला

जानलेवा हमले के इस मामले में करीब एक दशक तक कानूनी प्रक्रिया चली। इस दौरान मामले से जुड़े कई पहलुओं पर सुनवाई हुई और गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को राहत मिली है। वहीं, पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों ने इसे कानून व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला माना है।

दोषियों को भुगतनी होगी सजा

अदालत के आदेश के अनुसार, दोनों दोषियों को अब 7-7 साल की कठोर कारावास की सजा काटनी होगी। इसके अलावा लगाए गए जुर्माने की राशि भी जमा करनी होगी।

इस फैसले से यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में दोष साबित होने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाती है।