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जोधपुर में गोशाला अनुदान में 1 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप, शिकायतकर्ता बोला- मेरे खिलाफ दर्ज कराया था झूठा केस

 
जोधपुर में गोशाला अनुदान में 1 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप, शिकायतकर्ता बोला- मेरे खिलाफ दर्ज कराया था झूठा केस

जोधपुर जिले में गोशाला के नाम पर सरकारी अनुदान राशि में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डांगियावास थाना क्षेत्र के बिसलपुर स्थित श्री संभवनाथ राधे गोविंद गोशाला में करीब 1 करोड़ रुपये की राशि और सरकारी अनुदान हड़पने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। अब इस मामले में शिकायतकर्ता जोराराम ने अपने खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

परिवादी जोराराम का कहना है कि उन्होंने गोशाला में गायों के नाम पर मिलने वाली अनुदान राशि में कथित गड़बड़ी के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई थी। उनका आरोप है कि इसके बाद उन्हें दबाने के लिए उनके खिलाफ थाने में झूठी शिकायत दर्ज कराई गई।

जोराराम के मुताबिक, करीब एक साल पहले उनके खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उन्होंने दावा किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं थे। बाद में जब मामले की जांच हुई तो उनके अनुसार सामने आया कि रामप्रकाश ने उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि गोशाला में सरकारी अनुदान से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई कराने का प्रयास किया गया।

गोशाला में गायों के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर अब पुलिस जांच कर रही है। मामले में दस्तावेजों, अनुदान से संबंधित रिकॉर्ड और गोशाला में मौजूद पशुओं की संख्या समेत विभिन्न बिंदुओं की जांच की जा सकती है।

सरकारी अनुदान में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने के साथ वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है।

वहीं, शिकायतकर्ता जोराराम ने अपने खिलाफ दर्ज पुराने मामले को भी इसी विवाद से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब उन्होंने कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज उठाई तो उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई गई।

फिलहाल गोशाला में सरकारी अनुदान राशि के कथित फर्जीवाड़े और शिकायतकर्ता के खिलाफ पहले दर्ज मामले को लेकर जांच का मामला सामने है। पुलिस जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि करीब एक करोड़ रुपये की राशि में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।