Aapka Rajasthan

जयपुर नगर निगम चुनाव: मतदान के बाद शुरू हुई पार्षदों की बाड़ेबंदी, महापौर की कुर्सी के लिए भाजपा-कांग्रेस में मुकाबला तेज

 
जयपुर नगर निगम चुनाव: मतदान के बाद शुरू हुई पार्षदों की बाड़ेबंदी, महापौर की कुर्सी के लिए भाजपा-कांग्रेस में मुकाबला तेज

जयपुर नगर निगम चुनाव में 100 वार्डों पर मतदान खत्म होने के साथ ही अब सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है, लेकिन परिणाम आने से पहले ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है। दोनों ही दलों ने अपने खेमे से महापौर बनाने का दावा किया है।

मतदान खत्म होते ही शहर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर नगर निगम बोर्ड किसके हाथों में जाएगा। सियासी गलियारों से लेकर सट्टा बाजार तक में इसी को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, नतीजे आने से पहले दोनों प्रमुख दल किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते।

क्रॉस वोटिंग और पाला बदलने का डर

नगर निगम चुनाव में बहुमत का आंकड़ा हासिल करना दोनों पार्टियों के लिए अहम है। ऐसे में परिणामों के बाद पार्षदों की भूमिका निर्णायक होगी। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने प्रत्याशियों को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं।

पार्टियों को डर है कि अगर बोर्ड गठन की स्थिति में संख्या बल में मामूली अंतर रहा तो क्रॉस वोटिंग या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से पूरा समीकरण बदल सकता है। इसी आशंका के चलते दोनों खेमों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।

भाजपा-कांग्रेस ने ठोका महापौर बनाने का दावा

मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने जीत का दावा किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता ने विकास और सुशासन के मुद्दे पर पार्टी का समर्थन किया है और नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनेगा।

वहीं, कांग्रेस का दावा है कि शहर की जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है और पार्टी बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। दोनों दलों के नेता अपने-अपने प्रत्याशियों के संपर्क में हैं और चुनाव परिणाम के बाद की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

निर्दलीय बन सकते हैं किंगमेकर

अगर किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है। ऐसे में छोटे अंतर से जीत-हार की स्थिति में निर्दलीय प्रत्याशी बोर्ड गठन में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नगर निगम चुनाव में अक्सर अंतिम समय तक समीकरण बदलते रहते हैं। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पार्षद प्रत्याशियों को संभालकर रखने की कोशिश कर रही हैं।

अब परिणामों का इंतजार

100 वार्डों के मतदान के बाद अब सभी की नजरें मतगणना पर टिकी हैं। परिणाम आने के बाद ही साफ होगा कि जयपुर नगर निगम की कमान किस दल के हाथों में जाएगी। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही हैं, लेकिन असली तस्वीर चुनाव परिणाम और उसके बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरणों से ही साफ होगी।