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12 साल की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को हाईकोर्ट से राहत नहीं, उम्रकैद की सजा बरकरार

 
12 साल की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को हाईकोर्ट से राहत नहीं, उम्रकैद की सजा बरकरार

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच ने एक बेहद संवेदनशील और घृणित मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 12 साल की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने के दोषी पिता की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट के इस फैसले को न्याय व्यवस्था में एक सख्त और मिसाल कायम करने वाला कदम माना जा रहा है।

यह फैसला जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस ___ (डिवीजन बेंच) द्वारा सुनाया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह अपराध न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि समाज की नैतिकता और मानवता पर भी गहरा आघात है। कोर्ट ने माना कि एक पिता द्वारा अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ किया गया दुष्कर्म “दुर्लभ से दुर्लभतम” श्रेणी में आता है और ऐसे अपराध में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने सभी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता के बयान और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर सही निर्णय लिया है। आरोपी की ओर से सजा कम करने या रियायत देने के लिए दिए गए तर्कों को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी ने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार किया है और मासूम बच्ची के जीवन पर गहरा मानसिक और शारीरिक आघात पहुंचाया है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे मामलों में कठोर सजा देना जरूरी है, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए और भविष्य में इस तरह के जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। न्यायालय ने कहा कि बाल यौन अपराध न केवल पीड़िता का बचपन छीन लेते हैं, बल्कि उसके पूरे जीवन को प्रभावित करते हैं।

सरकारी वकील की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं और पीड़िता के बयान पूरी तरह विश्वसनीय हैं। वहीं, बचाव पक्ष द्वारा सजा में राहत की मांग को अदालत ने अस्वीकार कर दिया।