जोधपुर में पंचायतीराज चुनाव से पहले परिसीमन पूरा, अंतिम ड्राफ्ट से पहले ही तेज हुई सियासी हलचल
राजस्थान के जोधपुर जिले में आगामी पंचायतीराज चुनाव से पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। हालांकि परिसीमन का अंतिम ड्राफ्ट अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले ही जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। गांव-ढाणियों से लेकर जिला मुख्यालय तक इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है और इसे लेकर बड़ा सियासी अखाड़ा बनता नजर आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, परिसीमन के तहत पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों और वार्डों की सीमाओं में बदलाव किया गया है। कई जगहों पर नए वार्ड बनाए गए हैं तो कहीं पुराने वार्डों का स्वरूप बदल दिया गया है। इसी बदलाव ने स्थानीय नेताओं, सरपंचों और संभावित प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कई नेता अपने पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि परिसीमन से कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। जिन क्षेत्रों में अब तक एक ही परिवार या गुट का वर्चस्व था, वहां नए इलाकों के जुड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। वहीं कुछ नेताओं को अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के दूसरे वार्डों में चले जाने से नुकसान की आशंका सता रही है।
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अभी तक परिसीमन के अंतिम ड्राफ्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट जारी होने से पहले आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम रूप देकर अधिसूचना जारी की जाएगी। लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक दल और संभावित उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
ग्रामीण इलाकों में परिसीमन को लेकर लोगों की राय भी बंटी हुई है। कुछ लोग इसे जनसंख्या के हिसाब से जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि सीमाओं में बदलाव से स्थानीय समस्याओं और प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा। कई पंचायतों में लोगों ने प्रशासन से परिसीमन पर पुनर्विचार की मांग भी शुरू कर दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जोधपुर जिले में परिसीमन इस बार पंचायतीराज चुनाव को बेहद रोचक बना सकता है। नए वार्ड और बदली हुई सीमाएं पुराने सियासी समीकरणों को तोड़ने का काम कर सकती हैं। यही वजह है कि अंतिम ड्राफ्ट आने से पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है।
अब सभी की निगाहें परिसीमन के अंतिम ड्राफ्ट पर टिकी हैं। ड्राफ्ट जारी होते ही जहां राजनीतिक दल अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे, वहीं संभावित प्रत्याशी नए समीकरणों के हिसाब से अपनी चुनावी तैयारी को अंतिम रूप देना शुरू कर देंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में जोधपुर की ग्रामीण राजनीति और ज्यादा गरमाने के आसार हैं।
