JNVU में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर एबीवीपी का उग्र प्रदर्शन, मुख्य गेट पर चढ़े कार्यकर्ता, जबरन परिसर में घुसे
छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय कार्यालय (हेड ऑफिस) का घेराव किया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ कार्यकर्ता मुख्य गेट पर चढ़ गए और बाद में जबरन परिसर के अंदर प्रवेश कर गए।
जानकारी के अनुसार, एबीवीपी कार्यकर्ता छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए केंद्रीय कार्यालय तक पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान कई कार्यकर्ता मुख्य प्रवेश द्वार पर चढ़ गए, जिससे परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट खोलकर जबरन विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया और केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरना देते हुए लंबे समय तक नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे छात्रों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों की आवाज को मजबूत करने का माध्यम हैं और इन्हें जल्द से जल्द कराया जाना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। हालांकि, काफी देर तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के संबंध में छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन एबीवीपी ने साफ कर दिया है कि चुनाव की तारीख घोषित होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। छात्रसंघ चुनाव को लेकर अब विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच आगे की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
