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दुबई में फंसे राजस्थान के युवा, बोले- 16 घंटे काम कराते हैं; 50 मंजिल चढ़ने-उतरने से आते हैं चक्कर

 
दुबई में फंसे राजस्थान के युवा, बोले- 16 घंटे काम कराते हैं; 50 मंजिल चढ़ने-उतरने से आते हैं चक्कर

राजस्थान से रोजगार की तलाश में दुबई गए कुछ युवाओं ने वहां काम करने की परिस्थितियों को लेकर अपनी परेशानी जाहिर की है। युवाओं का कहना है कि उनसे रोजाना करीब 16 घंटे तक काम कराया जाता है। काम के दौरान उन्हें 50 मंजिल तक चढ़ना-उतरना पड़ता है, जिससे कई बार चक्कर आने जैसी परेशानी होती है। युवाओं के मुताबिक, वे कर्ज लेकर विदेश कमाने आए थे, लेकिन अब उनके सामने रहने और खाने की व्यवस्था को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है।

कर्ज लेकर गए थे विदेश, अब बढ़ी परेशानी

युवाओं ने बताया कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर कमाई की उम्मीद में दुबई पहुंचे थे। विदेश जाने के लिए कुछ लोगों ने कर्ज लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि वहां नौकरी करके वे परिवार की जरूरतें पूरी करेंगे और धीरे-धीरे कर्ज चुका देंगे।

हालांकि, युवाओं के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद काम की परिस्थितियां उनकी उम्मीदों से अलग निकलीं। उनका आरोप है कि उनसे लंबे समय तक काम कराया जा रहा है। लगातार शारीरिक मेहनत के कारण उनकी सेहत पर भी असर पड़ रहा है।

50 मंजिल चढ़ने-उतरने से होती है परेशानी

युवाओं का कहना है कि काम के दौरान उन्हें करीब 50 मंजिल तक बार-बार चढ़ना और उतरना पड़ता है। लंबे समय तक काम करने और लगातार सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से उन्हें थकान और चक्कर आने की शिकायत होती है।

उनके मुताबिक, काम के घंटों के अलावा रहने और खाने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इस वजह से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। युवाओं ने अपनी स्थिति बताते हुए मदद की जरूरत जताई है।

परिवारों की बढ़ी चिंता

विदेश में काम करने गए युवाओं की स्थिति को लेकर उनके परिवार भी चिंतित हो सकते हैं। परिवारों ने बेहतर भविष्य की उम्मीद में उन्हें विदेश भेजने के लिए आर्थिक इंतजाम किए थे। अब यदि युवाओं को काम, भोजन और रहने की व्यवस्था में परेशानी हो रही है, तो उनके सामने कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती भी है।

मदद और आधिकारिक कार्रवाई की जरूरत

ऐसे मामलों में संबंधित भारतीय दूतावास, भारतीय वाणिज्य दूतावास और प्रवासी भारतीय सहायता से जुड़े आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है। युवाओं को अपने नियोक्ता, नौकरी के अनुबंध, वेतन और काम के घंटों से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए, ताकि शिकायत की स्थिति में तथ्यों की जांच की जा सके।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में युवाओं की संख्या, राजस्थान के किस जिले से उनका संबंध है, कंपनी का नाम और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं है। युवाओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी जरूरी है। इन जानकारियों के सामने आने के बाद मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।