फर्जीवाड़े से लिए गए वीआईपी नंबरों पर परिवहन विभाग सख्त, 150 वाहन मालिकों का पंजीयन रद्द करने की तैयारी
परिवहन नियमों की अनदेखी कर फर्जीवाड़े के जरिए नई कारों के लिए पुरानी गाड़ियों के वीआईपी नंबर लेने वाले वाहन मालिकों पर अब गाज गिरने वाली है। परिवहन विभाग ने बिना बैकलॉग क्लियर किए और आवश्यक सत्यापन कराए बिना वीआईपी नंबर ट्रांसफर कराने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए करीब 150 वाहन मालिकों का पंजीयन रद्द करने की तैयारी कर ली है। विभाग की ओर से अगले सप्ताह अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इन वाहन मालिकों ने पुरानी गाड़ियों के वीआईपी या पसंदीदा नंबरों को नियमों के विपरीत तरीके से नई गाड़ियों में स्थानांतरित करा लिया। नियमानुसार, किसी भी पुराने वाहन का नंबर नई गाड़ी में ट्रांसफर कराने से पहले पुराने वाहन से संबंधित सभी बकाया (बैकलॉग), जैसे रोड टैक्स, चालान, पेनल्टी आदि का निपटारा और पूरी जांच-पड़ताल अनिवार्य होती है। इसके अलावा वाहन का विधिवत सत्यापन भी जरूरी होता है, लेकिन इन मामलों में नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
परिवहन विभाग की आंतरिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में दस्तावेजों में हेराफेरी कर सिस्टम में गलत जानकारी दर्ज की गई। कुछ वाहन मालिकों ने एजेंटों के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी करवाई, जबकि कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। विभाग अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, जिन 150 वाहनों पर कार्रवाई की तैयारी है, उन्हें अंतिम नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो इन वाहनों का पंजीयन रद्द कर दिया जाएगा। पंजीयन रद्द होने के बाद संबंधित वाहन सड़कों पर नहीं चल पाएंगे और दोबारा पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
परिवहन विभाग का कहना है कि वीआईपी नंबरों को लेकर बढ़ती होड़ के चलते इस तरह के फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी को भी विशेष छूट नहीं दी जाएगी। भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए ऑनलाइन सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि बिना सत्यापन कोई भी प्रक्रिया पूरी न हो सके।
इस कार्रवाई की खबर से वाहन मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है। कई लोग अब परिवहन कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और अपने दस्तावेज पूरे कराने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, आम जनता और सामाजिक संगठनों ने विभाग की इस सख्ती का स्वागत किया है और मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि आगे कोई भी नियमों से खिलवाड़ न कर सके।
अब सभी की नजर अगले सप्ताह जारी होने वाले अंतिम नोटिस पर टिकी है, जिसके बाद यह तय होगा कि कितने वाहन मालिकों पर वास्तव में पंजीयन रद्द करने की कार्रवाई होती है।
