कर्ज लेकर बेटे को परदेस भेजा था, पिता बोला- घर की तंगी दूर करने निकला था मेरा समद, अब बस एक बार उसे देखना चाहता हूं
घर की तंगी दूर करने निकला था मेरा समद... सोचा था दो पैसे कमाएगा तो परिवार की सांसें आसानी से चलेंगी। ब्याज पर कर्ज लेकर बेटे को परदेस भेजा था, लेकिन क्या खबर थी कि वहां खुशियों की जगह बदकिस्मती इंतजार कर रही है। मैं मरूं या जीऊं, बस एक बार बेटे को देखना चाहता हूं।”
ये शब्द उस पिता के हैं, जिसकी आंखों के सामने परिवार की उम्मीदें टूट गई हैं। आर्थिक परेशानियों के बीच उसने अपने बेटे को परदेस भेजा था, ताकि वह मेहनत कर परिवार की स्थिति सुधार सके। बेटे के जाने के समय पिता को उम्मीद थी कि कुछ साल की मेहनत के बाद घर की गरीबी दूर होगी और परिवार बेहतर जिंदगी जी सकेगा। इसके लिए उसने ब्याज पर कर्ज तक लिया था।
समद के परदेस जाने के बाद परिवार उसकी कमाई और वापसी का इंतजार कर रहा था। घरवालों को उम्मीद थी कि बेटा वहां मेहनत करेगा और धीरे-धीरे कर्ज चुकाने में मदद करेगा। लेकिन अचानक सामने आई एक दुखद घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
पिता के लिए सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि जिस बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद में हजारों किलोमीटर दूर भेजा था, आज उसी बेटे को देखने के लिए वह बेबस नजर आ रहा है। परिवार के लोगों का कहना है कि समद के जाने के पीछे उनकी मजबूरी थी। आर्थिक हालात ठीक नहीं थे और घर चलाने के लिए अतिरिक्त आमदनी की जरूरत थी।
पिता ने बेटे को परदेस भेजने के लिए कर्ज लिया था। उसके मन में यही था कि बेटा वहां काम करेगा, पैसे कमाएगा और परिवार की मुश्किलें धीरे-धीरे कम हो जाएंगी। लेकिन अब वही कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियां उसके सामने हैं और बेटे की चिंता सबसे बड़ी बन गई है।
परिवार की हालत इस समय बेहद खराब है। घर में मातम जैसा माहौल है और परिजन लगातार बेटे की खबर का इंतजार कर रहे हैं। पिता की आंखों में सिर्फ एक ही उम्मीद है कि किसी तरह उसका बेटा उसके सामने आ जाए। वह बार-बार यही कह रहा है कि जिंदगी में अब उसे किसी चीज की चाह नहीं है, बस एक बार अपने बेटे को देखना चाहता है।
परदेस जाकर परिवार का भविष्य संवारने का सपना देखने वाले समद की कहानी ने परिवार की आर्थिक मजबूरियों को भी सामने ला दिया है। गरीबी और रोजगार की तलाश में कई युवा अपने घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों और देशों का रुख करते हैं। उनके पीछे परिवार उम्मीद लगाए बैठा रहता है कि बेटा या बेटी मेहनत कर घर की स्थिति बदलेगा।
लेकिन जब परदेस से कोई दुखद खबर आती है तो परिवार के लिए उसे स्वीकार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। समद के पिता की पीड़ा भी इसी दर्द को बयां कर रही है। जिस बेटे को उन्होंने कर्ज लेकर बेहतर भविष्य के लिए भेजा था, आज उसी बेटे के लिए वह भगवान से गुहार लगा रहे हैं।
