झुंझुनूं में वन विभाग के DFO कार्यालय में 3.37 लाख की EMD राशि का मामला, रकम लेने के बाद कनिष्ठ लिपिक लापता
झुंझुनूं में वन विभाग के DFO कार्यालय से वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। टेंडर की धरोहर राशि यानी EMD के 3.37 लाख रुपए लेने के बाद विभाग का कनिष्ठ लिपिक लापता हो गया। आरोप है कि लिपिक ने 18 अगस्त को शारदा इंटरप्राइजेज से पूरी रकम नकद प्राप्त की थी। इसके बाद से उसके कार्यालय नहीं पहुंचने और रकम विभाग के खाते में जमा नहीं कराने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग के DFO कार्यालय में टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी धरोहर राशि जमा कराने और उसके रिकॉर्ड की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर तय होती है। इसी प्रक्रिया के तहत शारदा इंटरप्राइजेज से 3.37 लाख रुपए की EMD राशि नकद ली गई थी। आरोप है कि यह रकम कनिष्ठ लिपिक ने 18 अगस्त को अपने पास ली थी।
रकम लेने के बाद जब संबंधित लिपिक कार्यालय नहीं पहुंचा तो विभागीय अधिकारियों को मामले की जानकारी हुई। इसके बाद रकम के संबंध में रिकॉर्ड खंगाला गया। विभाग के स्तर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 3.37 लाख रुपए कहां जमा किए गए और राशि से संबंधित दस्तावेजों में क्या प्रविष्टियां की गई हैं।
मामला सामने आने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने लिपिक से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसके लापता होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। अब विभागीय स्तर पर पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इस मामले में वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बीच यह भी जांच का विषय है कि टेंडर की EMD राशि नकद किस प्रक्रिया के तहत ली गई और रकम प्राप्त करने के बाद उसे विभागीय खाते या निर्धारित मद में जमा कराने की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
विभागीय अधिकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। साथ ही लिपिक की तलाश भी की जा रही है, ताकि उससे रकम और पूरे घटनाक्रम के संबंध में पूछताछ की जा सके। यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल 3.37 लाख रुपए की EMD राशि को लेकर मामला जांच के घेरे में है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
