बेटे ने 20 साल बाद चुकाया पिता का कर्ज: 69 लेनदारों ने माफ कर दिया था 90% कर्ज, फिर भी निभाया अपना वादा; मनाया ‘पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव’
राजस्थान के झुंझुनूं से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो जिम्मेदारी, संस्कार और पिता के प्रति सम्मान की मिसाल पेश करती है। पिता के निधन के बाद परिवार पर करीब एक करोड़ रुपए का कर्ज था। मुश्किल समय में 69 लेनदारों ने परिवार की स्थिति को समझते हुए करीब 90 प्रतिशत कर्ज माफ कर दिया था। लेकिन बेटे मधुसूदन खेतान ने इसे अपनी जिम्मेदारी का अंत नहीं माना। उन्होंने तय किया कि पिता के नाम पर लिया गया कर्ज वे अपनी ओर से जरूर चुकाएंगे। करीब 20 साल बाद उन्होंने अपना यह संकल्प पूरा किया।
23 साल की उम्र में लिया था संकल्प
मधुसूदन खेतान ने बताया कि पिता के निधन के बाद परिवार पर बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी आ गई थी। करीब एक करोड़ रुपए के कर्ज ने परिवार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया था। ऐसे समय में 69 लेनदारों ने उदारता दिखाते हुए लगभग 90 प्रतिशत कर्ज माफ कर दिया। यह परिवार के लिए बड़ी राहत थी।हालांकि, मधुसूदन के मन में यह बात बनी रही कि जिन लोगों ने उनके पिता को आर्थिक मदद दी थी, उनके प्रति परिवार की जिम्मेदारी अभी बाकी है। उन्होंने 23 साल की उम्र में संकल्प लिया कि वह समय के साथ सभी का कर्ज चुकाएंगे। इसके बाद उन्होंने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए।
लेनदारों ने माफ किया, लेकिन बेटे ने नहीं भुलाया कर्ज
मधुसूदन का कहना था कि लेनदारों ने भले ही कर्ज माफ कर दिया था, लेकिन वे इसे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होने का आधार नहीं मानते थे। उनके अनुसार, पिता ने जिन लोगों से मदद ली थी, उनके प्रति सम्मान और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी था। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब दो दशक तक अपने संकल्प को जीवित रखा।
संकल्प पूरा होने पर मनाया पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव
करीब 20 साल बाद जब मधुसूदन ने अपना संकल्प पूरा किया तो इसे केवल कर्ज चुकाने की घटना तक सीमित नहीं रखा। इस अवसर पर उन्होंने ‘पितृ ऋण मुक्ति महोत्सव’ मनाया। यह आयोजन उनके लिए पिता के प्रति सम्मान और वर्षों पहले लिए गए वादे को पूरा करने का प्रतीक बना।मधुसूदन खेतान की यह कहानी बताती है कि जिम्मेदारी केवल कानूनी या आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं होती। कई बार इंसान अपने संस्कार और आत्मसम्मान के लिए भी वादे निभाता है। पिता के निधन के बाद लिया गया उनका संकल्प और 20 साल बाद उसे पूरा करना अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
