अमेरिका से समझौते के विरोध में प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव: प्रदर्शनकारियों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी; किसानों को नुकसान पहुंचने का आरोप
अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के विरोध में किसानों और संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका के साथ होने वाला समझौता देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर फैसला लेना चाहिए। उनका दावा है कि यदि कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के आयात को बढ़ावा दिया गया तो इसका सीधा असर देश के किसानों की आमदनी और फसलों की कीमतों पर पड़ सकता है।
कलेक्ट्रेट का किया घेराव
अमेरिका से समझौते के विरोध में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्य द्वार के आसपास प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने की कोशिश की।प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर अतिरिक्त बल तैनात किया। काफी देर तक प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी देने का ऐलान किया।इसके बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
किसानों को बर्बाद करने का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ किसी भी ऐसे समझौते से भारत के कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे किसानों को नुकसान होने की आशंका है। उनका कहना है कि विदेशी कृषि उत्पादों की बाजार में अधिक उपलब्धता होने पर घरेलू फसलों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य और घरेलू बाजार को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई जाएं।
सरकार से समझौते पर पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के प्रावधानों को सार्वजनिक करने और किसानों से जुड़े संगठनों के साथ चर्चा करने की मांग की। उनका कहना है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले लेने से पहले किसानों की राय को शामिल किया जाना चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सता है।
फिलहाल कलेक्ट्रेट घेराव और सामूहिक गिरफ्तारी के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसानों के हितों और घरेलू कृषि बाजार की सुरक्षा के लिए है। वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
