Aapka Rajasthan

झुंझुनूं के BDK अस्पताल में दवा वितरण में लापरवाही, बिना कोट और नेम प्लेट के मरीजों को दवा दे रहे फार्मासिस्ट

 
झुंझुनूं के BDK अस्पताल में दवा वितरण में लापरवाही, बिना कोट और नेम प्लेट के मरीजों को दवा दे रहे फार्मासिस्ट

झुंझुनूं के बीडीके जिला अस्पताल में दवा वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के दवा काउंटर पर कई फार्मासिस्ट बिना सफेद कोट, नेम प्लेट और किसी भी पहचान के मरीजों को दवाएं वितरित करते नजर आ रहे हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दवा देने वाले कर्मचारियों की पहचान करने में परेशानी हो रही है।

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के नियमों के अनुसार, फार्मासिस्टों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है। इसके बावजूद बीडीके जिला अस्पताल में इन नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है।

मरीजों को नहीं हो पाती दवा देने वाले की पहचान

अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज दवा लेने पहुंचते हैं। दवा काउंटर पर तैनात कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट नहीं होने से मरीजों को यह पता नहीं चल पाता कि उन्हें दवा कौन दे रहा है।

मरीजों का कहना है कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या या शिकायत की स्थिति में संबंधित व्यक्ति तक पहुंचा जा सके।

PCI के नियमों का नहीं हो रहा पालन

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुसार फार्मासिस्टों को मरीजों के सामने अपनी पहचान स्पष्ट रखनी चाहिए। इसके लिए सफेद कोट और नेम प्लेट जैसे नियम निर्धारित किए गए हैं।

इन नियमों का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है। लेकिन बीडीके जिला अस्पताल में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थान में इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

लोगों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन दवा काउंटर पर तैनात सभी फार्मासिस्टों को निर्धारित ड्रेस और पहचान के साथ ड्यूटी करने के निर्देश दे।

व्यवस्था सुधारने की जरूरत

स्वास्थ्य सेवाओं में दवा वितरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। छोटी सी लापरवाही भी मरीजों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन को नियमों की पालना सुनिश्चित करने की जरूरत है।

फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।