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झुंझुनूं ने बदली पराली की तस्वीर: खेती का वेस्ट बना बिजली उत्पादन की बड़ी ताकत

 
झुंझुनूं ने बदली पराली की तस्वीर: खेती का वेस्ट बना बिजली उत्पादन की बड़ी ताकत

जहां एक ओर पराली किसानों और पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या मानी जाती है, वहीं राजस्थान के झुंझुनूं जिले ने इस चुनौती को अवसर में बदलकर नई मिसाल पेश की है। जिले के मंड्रेला रोड पर स्थापित आधुनिक बायोमास पावर प्लांट अब खेती के वेस्टेज यानी पराली से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन कर रहा है। इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

हर साल फसल कटाई के बाद बड़ी मात्रा में निकलने वाली पराली किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है। खेतों को जल्दी खाली करने के लिए कई किसान पराली जलाने पर मजबूर हो जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। लेकिन झुंझुनूं में अब यही पराली ऊर्जा उत्पादन का महत्वपूर्ण स्रोत बन गई है।

मंड्रेला रोड स्थित बायोमास पावर प्लांट में किसानों से पराली और कृषि अवशेष खरीदे जा रहे हैं। इसके बाद आधुनिक तकनीक के जरिए इन्हें प्रोसेस कर बिजली बनाई जा रही है। इससे एक ओर किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पराली जलाने की समस्या में भी कमी आ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार बायोमास ऊर्जा उत्पादन पर्यावरण के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जाता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटती है। झुंझुनूं का यह मॉडल अब अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले पराली उनके लिए बोझ थी, लेकिन अब वही आय का जरिया बन गई है। प्लांट