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बीमा कंपनी की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग सख्त: बोलेरो चोरी मामले में 4.80 लाख रुपए देने के आदेश, 9% ब्याज भी लगेगा

 
बीमा कंपनी की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग सख्त: बोलेरो चोरी मामले में 4.80 लाख रुपए देने के आदेश, 9% ब्याज भी लगेगा

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को बोलेरो चोरी के एक मामले में बड़ी राहत नहीं दी। आयोग ने कंपनी को वाहन चोरी के क्लेम की राशि 4 लाख 80 हजार रुपए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश दिए हैं।मामले में सामने आया कि बीमा कंपनी के सर्वेयर की रिपोर्ट मिलने के बाद भी कंपनी ने लंबे समय तक क्लेम का निपटारा नहीं किया। करीब 572 दिन तक क्लेम लंबित रखने को आयोग ने सेवा में कमी माना और बीमा कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

बोलेरो चोरी के बाद मांगा था बीमा क्लेम

जानकारी के अनुसार, परिवादी की बोलेरो चोरी हो गई थी। वाहन का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। चोरी की घटना के बाद वाहन मालिक ने नियमानुसार बीमा कंपनी में क्लेम प्रस्तुत किया।कंपनी की ओर से मामले की जांच के लिए सर्वेयर नियुक्त किया गया। सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट भी बीमा कंपनी को सौंप दी, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने क्लेम राशि जारी नहीं की।

572 दिन तक नहीं किया क्लेम का निपटारा

परिवादी ने आरोप लगाया कि सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद भी बीमा कंपनी ने करीब 572 दिनों तक क्लेम को लंबित रखा। इससे परेशान होकर उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि बीमा कंपनी द्वारा अनावश्यक देरी करना उपभोक्ता सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

ब्याज सहित भुगतान के आदेश

जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह परिवादी को 4 लाख 80 हजार रुपए की बीमा राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।आयोग के फैसले को बीमा कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि क्लेम प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कर उपभोक्ताओं को परेशान नहीं किया जा सकता।

उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा पर जोर

उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे दावों का समय पर निस्तारण करें। सर्वे रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद भी लंबे समय तक क्लेम रोकना उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है।इस फैसले से बीमा क्लेम में देरी का सामना कर रहे अन्य उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है।