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CM बोले- प्लास्टिक खेतों तक पहुंचकर मिट्टी को पहुंचाता है नुकसान, बर्तन बैंक मॉडल को बताया मददगार

 
CM बोले- प्लास्टिक खेतों तक पहुंचकर मिट्टी को पहुंचाता है नुकसान, बर्तन बैंक मॉडल को बताया मददगार

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण और कृषि भूमि को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का कचरा केवल सड़कों और नालियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेतों तक पहुंचकर मिट्टी की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए अपनाए जा रहे ‘बर्तन बैंक’ जैसे स्थानीय मॉडल को उपयोगी बताया। राज्य सरकार पहले ही ग्राम पंचायत स्तर पर बर्तन बैंक स्थापित करने की दिशा में कदम उठा चुकी है।

सम्मेलन में सरपंच नीरू यादव से किया संवाद

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने झुंझुनूं जिले की लांबी अहीर ग्राम पंचायत की सरपंच नीरू यादव से संवाद किया। नीरू यादव के नेतृत्व में गांव में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने के लिए बर्तन बैंक की शुरुआत की गई थी। इस मॉडल के तहत शादी और अन्य सामाजिक आयोजनों में डिस्पोजल और प्लास्टिक के बर्तनों की जगह दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले बर्तन उपलब्ध कराए जाते हैं।

नीरू यादव के बर्तन बैंक मॉडल को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, गांव में बड़ी संख्या में बर्तन उपलब्ध कराकर उन्हें सामाजिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना और गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।

राजस्थान की ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक की पहल

राजस्थान सरकार ने 2025-26 के बजट में ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके तहत शुरुआती चरण में एक हजार ग्राम पंचायतों में स्टील के बर्तन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पंचायत के लिए कम से कम 400 सेट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। एक सेट में एक प्लेट, तीन कटोरी, एक चम्मच और एक गिलास शामिल हैं।

इन बर्तन बैंकों का संचालन आजीविका से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के जरिए किया जाना है। इससे प्लास्टिक और डिस्पोजल के इस्तेमाल को कम करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को संचालन से जोड़ने का भी प्रावधान किया गया है।

सामाजिक आयोजनों में प्लास्टिक का विकल्प

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों में होने वाले शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों, बैठकों और अन्य सामाजिक आयोजनों में सिंगल यूज प्लास्टिक तथा डिस्पोजल बर्तनों की खपत को कम करना है। स्टील के बर्तन दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे कार्यक्रमों के बाद निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर किए जा रहे ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। राजस्थान सरकार पहले भी सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता और प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण से जुड़ी पहल की जानकारी दे चुकी है।