“भाई, थोड़ा गुटखा मुझे भी खिलाओगे क्या…”: 16 साल पहले कैंसर ने छीना चेहरा, अब लोगों को दिखाकर कर रहे जागरूक
“भाई, थोड़ा गुटखा मुझे भी खिलाओगे क्या…” — यह सवाल सुनकर लोग चौंक जाते हैं। जब सामने खड़ा शख्स अपना चेहरा दिखाता है, तो देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। 16 साल पहले मुंह के कैंसर ने उनका चेहरा और जबड़ा छीन लिया था। आज वही व्यक्ति अपने दर्द को हथियार बनाकर तंबाकू और गुटखे के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहा है।
कभी सामान्य जिंदगी जीने वाले इस शख्स को गुटखा और तंबाकू खाने की आदत थी। शुरुआत शौक में हुई, जो धीरे-धीरे लत में बदल गई। दिनभर गुटखा मुंह में रखना उनकी दिनचर्या बन चुका था। लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यही आदत उनकी जिंदगी बदल देगी।
कुछ सालों बाद उनके मुंह में घाव और सूजन की समस्या शुरू हुई। शुरुआत में उन्होंने इसे मामूली समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन दर्द बढ़ता गया। जांच कराने पर पता चला कि उन्हें ओरल कैंसर हो चुका है। डॉक्टरों ने जान बचाने के लिए सर्जरी की सलाह दी, जिसमें उनका जबड़ा निकालना पड़ा। सर्जरी के बाद उनकी शक्ल पूरी तरह बदल गई। बोलने, खाने और सामान्य तरीके से जीने तक में परेशानी होने लगी। परिवार और समाज के बीच आत्मविश्वास भी टूट गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
आज वही शख्स लोगों को रोक-रोककर कहते हैं, “भाई, थोड़ा गुटखा मुझे भी खिलाओगे क्या?” जब लोग हैरान होकर देखते हैं, तो वह अपना चेहरा दिखाते हैं और कहते हैं, “यही हाल होता है गुटखे का।” उनका यह तरीका लोगों पर गहरा असर छोड़ता है। वे स्कूलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर युवाओं को तंबाकू के नुकसान बताते हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी कहानी से एक भी व्यक्ति गुटखा छोड़ दे, तो उनका दर्द सार्थक हो जाएगा।
डॉक्टरों का भी कहना है कि राजस्थान सहित देशभर में मुंह के कैंसर के मामलों में तंबाकू और गुटखा सबसे बड़ी वजह हैं। समय रहते आदत छोड़ना ही बचाव का सबसे कारगर तरीका है। यह शख्स अब अपनी जिंदगी को एक मिशन बना चुके हैं— ताकि कोई और उनके जैसी पीड़ा न झेले। उनका संदेश साफ है: “गुटखा छोड़ो, जिंदगी चुनो।”
