सुबह के चार बजे खेतों की ओर कूच करते युवा, सपनों और परिवार की उम्मीदें साथ लिए ट्रैक पर
सुबह के चार बजे होते ही गांव की सड़कें और खेतों की मेढ़ युवा खिलाड़ियों के कदमों की गूँज से जीवित हो उठती हैं। कच्ची सड़कें, मिट्टी की मेढ़ और खेतों के रास्ते उनके लिए ट्रैक-ग्राउंड बन गए हैं। ये युवा अपने पैरों की ठसक और मेहनत से न केवल खुद को तराश रहे हैं, बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करना चाहते हैं।
कुछ युवाओं के लिए यह दौड़ माँ का सपना है, तो कुछ के लिए यह दादाजी का अधूरा सपना। हर कदम में उनके चेहरे पर दृढ़ता और आंखों में उम्मीद झलकती है। खेतों की कच्ची मिट्टी, सुबह की ठंडी हवा और हल्की धूप के बीच ये युवा दिन की शुरुआत करते हैं, जो उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।
गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि यह दृश्य सिर्फ खेल का नहीं, बल्कि जीवन की सीख भी देता है। मेहनत, अनुशासन और धैर्य का मेल यहां साफ दिखाई देता है। बच्चे और युवा इन मैदानों पर हर दिन दौड़ते, कूदते और अपनी सीमाओं को पार करने की कोशिश करते हैं।
स्थानीय खेल प्रशिक्षक बताते हैं कि इस तरह की प्रैक्टिस युवा प्रतिभाओं को शहरों और राष्ट्रीय स्तर के मैदानों के लिए तैयार करती है। ग्रामीण इलाकों में सीमित संसाधनों के बावजूद, जुनून और सपनों की ताकत इन्हें आगे बढ़ने का हौसला देती है।
हर सुबह के इस नज़ारे में सिर्फ दौड़ नहीं, बल्कि सपनों, परिवार की उम्मीदों और मेहनत की कहानी छुपी है। यह दिखाता है कि छोटे गांवों के युवा भी बड़े मुकाम हासिल करने की राह पर हैं, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की जरूरत है।
