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जालोर में मानसून के पैटर्न में बदलाव, 10 साल में औसत बारिश में 12% से अधिक वृद्धि

 
जालोर में मानसून के पैटर्न में बदलाव, 10 साल में औसत बारिश में 12% से अधिक वृद्धि

जालोर जिले में मानसून के दौरान पिछले एक दशक में बारिश के पैटर्न में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में जिले की औसत वर्षा में 12 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि लगातार और असमान बारिश के कारण बनी है, जिससे क्षेत्र का मौसमी संतुलन भी प्रभावित हुआ है।

मौसम संबंधी आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 10 वर्षों में से 7 वर्षों में जालोर जिले में औसत से अधिक या उससे भी दोगुनी बारिश दर्ज की गई है। यह स्थिति यह संकेत देती है कि मानसून अब पहले की तुलना में अधिक अनियमित और तीव्र हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बदलाव जलवायु परिवर्तन और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों में आए उतार-चढ़ाव का परिणाम हो सकते हैं। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सामान्य से कम वर्षा का यह पैटर्न कृषि और जल प्रबंधन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है।

किसानों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर अधिक बारिश वाले वर्षों में जलभराव और फसलों को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर कम बारिश वाले वर्षों में सिंचाई की कमी ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया। इस असंतुलन के कारण कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।

जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ी हुई वर्षा का सकारात्मक पहलू यह है कि भूजल स्तर में कुछ क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है, लेकिन अनियमित बारिश के कारण जल संचयन और उपयोग की योजना बनाना कठिन हो गया है।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून के इस बदलते रुझान को देखते हुए आने वाले समय में अधिक सटीक पूर्वानुमान और जल प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता होगी। साथ ही, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना और कृषि पद्धतियों में बदलाव करना भी जरूरी है।