जालोर में प्रस्तावित नेशनल हाईवे कॉरिडोर को लेकर किसानों में आक्रोश
जालोर जिले में प्रस्तावित नेशनल हाईवे कॉरिडोर के निर्माण को लेकर किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि खातेदारी की जमीन के अधिग्रहण के बदले उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह वर्तमान डीएलसी दरों के हिसाब से बेहद कम है। उनका आरोप है कि इस दर पर उन्हें अपनी जमीन बेचने के बाद बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
स्थानीय किसानों ने बताया कि उन्हें अपने गांव और खेती के लिए जमीन से गहरा लगाव है। हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव आने के बाद वे चिंतित हैं कि उनके जीवनयापन और कृषि गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। कई किसानों ने यह भी कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और निवेश के बाद अपनी जमीन तैयार की है, और कम मुआवजा मिलने से उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलेगा।
किसानों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि मुआवजे की दरों में वृद्धि की जाए और उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य दिया जाए। उनका कहना है कि सिर्फ डीएलसी दरों पर आधारित मुआवजा उनकी लागत और भविष्य की आय की भरपाई नहीं कर सकता।
जालोर के अधिकारियों ने कहा कि नेशनल हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया कानून और नियमों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और मुआवजे को लेकर किसी भी तरह के निर्णय के लिए अधिकारियों से संवाद करें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किसानों की भागीदारी और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि मुआवजा दरें पर्याप्त नहीं हों, तो इससे परियोजना के विरोध और विरोध प्रदर्शन की संभावना बढ़ सकती है।
स्थानीय नेताओं और किसान संगठनों ने भी प्रशासन से आग्रह किया है कि वे किसानों के हितों की रक्षा करें और मुआवजे के मुद्दे को जल्दी से जल्दी सुलझाएं। उनका कहना है कि उचित मुआवजा न मिलने पर किसानों को आंदोलन की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस प्रस्तावित नेशनल हाईवे कॉरिडोर से क्षेत्र का इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी जरूर बढ़ेगा, लेकिन किसानों के आर्थिक नुकसान को नजरअंदाज करना परियोजना की सफलता के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के हितों की रक्षा के बिना कोई भी विकास कार्य स्थिर और टिकाऊ नहीं रह सकता।
जालोर में किसानों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अब संवाद और समझौता ही सबसे कारगर विकल्प माना जा रहा है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मुआवजे और अधिग्रहण प्रक्रिया के सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
इस तरह, जालोर में नेशनल हाईवे कॉरिडोर की योजना न केवल विकास का प्रतीक है, बल्कि किसानों के हित और आर्थिक सुरक्षा की चुनौती भी सामने लाई है। इस परियोजना की सफलता किसानों और प्रशासन के सहयोग और पारदर्शी संवाद पर निर्भर करेगी।
