Ramapir Mela 2025: सीमाओं से परे आस्था का संगम, पाकिस्तान में बाबा रामदेव के मेले में पहुंचे हजारों श्रद्धालु
जैसलमेर के रामदेवरा में जहाँ लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के तांडो अल्लाहयार स्थित बाबा रामदेव मंदिर में लगभग 2000 हिंदू और मुसलमान दर्शन कर रहे हैं। सिंध क्षेत्र के इस कस्बे की 45% आबादी हिंदू है। बाबा रामसा पीर को यहाँ रुणेचावाला रामदेव कहा जाता है।
तांडो अल्लाहयार में बाबा रामदेव मेले में जाते श्रद्धालु
तांडो अल्लाहयार कस्बा पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मुनाबाव से लगभग 180 किलोमीटर दूर है। यहाँ लगभग 45% हिंदू रहते हैं। यह कस्बा लगभग 1700 ईस्वी में बसा था। विभाजन से पहले यहाँ हिंदुओं की आबादी अधिक थी। 1947, 1965 और 1971 में यहाँ से बड़ी संख्या में हिंदू पलायन कर गए। तांडो अल्लाहयार से आए हिंदू बाड़मेर में कम बसे हैं, वे गुजरात, जोधपुर और बीकानेर की ओर पलायन कर गए। इन दिनों यह कस्बा बाबा रामदेव के आगमन को लेकर पाकिस्तान में चर्चा में है। यहाँ भी 'म्हारो हेलो सुनो नी रामापीर' की गूंज सुनाई देती है। दरअसल, यहाँ बाबा रामदेव का एक प्राचीन मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में हर साल मेला लगता है। भाद्रपद द्वितीया (बाबा दूज) के दिन मेला लगता है। लगभग नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा रामदेव के भक्त पास के मीठी, थारपारकर, दीपला और हैदराबाद से भी आते हैं।
पैदल ज़्यादा
जिस तरह रामदेवरा में पैदल जत्थे ज़्यादा आते हैं, उसी तरह बाबा के भक्त यहाँ भी पैदल जत्थों के रूप में पहुँचते हैं। इनमें मेघवाल, माली, मुस्लिम और भील समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। राजपूत, ब्राह्मण और अन्य लोग भी पहुँचते हैं।
भंडारा और सेवा भी
100 से 150 किलोमीटर दूर के गाँवों से आने वाले इन जत्थों के लिए विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा भंडारा और सेवा भी की जाती है। जब ये रात भर रुकते हैं, तो सुरक्षा और भोजन का ध्यान रखा जाता है। भजन मंडलियाँ इन जत्थों के साथ जाती हैं।
मेला भी लगता है
भारत के सभी लोक देवताओं के उपासक पाकिस्तान में भी हैं। रामसापीर के भक्तों की संख्या बहुत ज़्यादा है। बाबा के बीज पर नारियल चढ़ाए जाते हैं। तांडो अल्लाहयार में एक बड़ा मंदिर है। बाबा के मंदिर और भी हैं।
