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जैसलमेर की कॉटन मिल में विभाग की दबिश, सत्यापित बाट नहीं मिलने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना

 
जैसलमेर की कॉटन मिल में विभाग की दबिश, सत्यापित बाट नहीं मिलने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना

राजस्थान के जैसलमेर में कॉटन मिल का निरीक्षण करने पहुंची विभागीय टीम को जांच के दौरान कमियां मिलीं। सत्यापित बाट नहीं मिलने पर विभाग ने मिल संचालक पर 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कार्रवाई के दौरान माप-तौल से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच की गई। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य व्यापारिक गतिविधियों में माप-तौल के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

कॉटन मिल में जांच के लिए पहुंची टीम

जानकारी के अनुसार, विभागीय अधिकारियों ने जैसलमेर स्थित एक कॉटन मिल में दबिश देकर निरीक्षण किया। इस दौरान वहां इस्तेमाल होने वाले बाट और माप-तौल से जुड़े उपकरणों की जांच की गई। जांच में सत्यापित बाट नहीं मिलने पर संबंधित मिल के खिलाफ कार्रवाई की गई।

व्यापारिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले माप-तौल के उपकरण निर्धारित नियमों के अनुरूप होने चाहिए। इससे खरीद-बिक्री के दौरान वजन को लेकर पारदर्शिता बनी रहती है और ग्राहकों तथा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा होती है।

सत्यापित बाट नहीं मिलने पर लगाया जुर्माना

निरीक्षण के दौरान सत्यापित बाट नहीं मिलने पर विभाग ने 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। माप-तौल के उपकरणों का सत्यापन इसलिए जरूरी होता है, ताकि उनसे किया जाने वाला वजन सही और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

यदि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में नियमों के अनुसार सत्यापित उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो संबंधित विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। इस मामले में भी जांच के दौरान मिली कमी के आधार पर जुर्माना लगाया गया।

माप-तौल के नियमों का पालन जरूरी

कॉटन मिल जैसी इकाइयों में माल की खरीद-बिक्री और वजन संबंधी कामकाज के दौरान माप-तौल की सटीकता महत्वपूर्ण होती है। बाटों और अन्य उपकरणों का सत्यापन नहीं होने से वजन की शुद्धता पर सवाल उठ सकते हैं।

इसी वजह से संबंधित विभाग समय-समय पर व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करता है। इन जांचों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि कारोबारी निर्धारित नियमों का पालन करें और माप-तौल में किसी तरह की अनियमितता न हो।

आगे भी जारी रह सकती है जांच

जैसलमेर की कॉटन मिल में कार्रवाई के बाद व्यापारिक प्रतिष्ठानों में माप-तौल से जुड़े नियमों के पालन का मुद्दा सामने आया है। विभागीय निरीक्षण का उद्देश्य कमियों की पहचान करना और नियमों के अनुरूप व्यवस्था बनाए रखना है।

व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले बाट और माप-तौल के उपकरणों का समय पर सत्यापन कराएं तथा संबंधित नियमों का पालन करें। इससे अनावश्यक कार्रवाई से बचने के साथ व्यापारिक लेन-देन में पारदर्शिता भी बनी रहती है।

फिलहाल, कॉटन मिल में सत्यापित बाट नहीं मिलने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग की ओर से निरीक्षण के दौरान मिली अन्य कमियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध होने पर कार्रवाई की पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।