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मादा कैराकाल को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा, जैसलमेर में दूसरी बार हुआ प्रयोग

 
मादा कैराकाल को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा, जैसलमेर में दूसरी बार हुआ प्रयोग

जैसलमेर में वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों ने एक मादा कैराकाल को रेडियो कॉलर लगाने के बाद सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया। यह जैसलमेर में कैराकाल पर रेडियो कॉलर लगाने का दूसरा प्रयोग बताया जा रहा है। मादा कैराकाल को कुछ समय पहले कमजोर हालत में पाया गया था। उपचार और देखभाल के बाद उसकी स्थिति में सुधार होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।

कैराकाल राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ जंगली बिल्ली प्रजाति का वन्यजीव है। यह अपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और विशिष्ट लंबे कानों के लिए पहचाना जाता है। कैराकाल की संख्या कम होने के कारण इसके संरक्षण और गतिविधियों पर निगरानी को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कमजोर हालत में मिली थी मादा कैराकाल

जानकारी के अनुसार, मादा कैराकाल को जैसलमेर क्षेत्र में कमजोर हालत में देखा गया था। वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू कर उपचार और निगरानी में रखा। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद विशेषज्ञों ने उसे दोबारा जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया।

रिलीज से पहले उसके शरीर पर रेडियो कॉलर लगाया गया। इस कॉलर की मदद से वन विभाग और विशेषज्ञ उसकी गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। इससे यह जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी कि कैराकाल जंगल में किस क्षेत्र में विचरण करती है, कितनी दूरी तय करती है और उसका व्यवहार कैसा रहता है।

रेडियो कॉलर से मिलेगी अहम जानकारी

रेडियो कॉलर वन्यजीवों की निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है। इसके जरिए संबंधित टीम जानवर की लोकेशन और उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकती है। कैराकाल जैसी दुर्लभ प्रजाति के लिए यह निगरानी संरक्षण की रणनीति तैयार करने में उपयोगी हो सकती है।

विशेषज्ञ इस मादा कैराकाल की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उसके आवास, विचरण क्षेत्र और व्यवहार को समझने का प्रयास किया जाएगा।

जैसलमेर में दूसरी बार प्रयोग

जैसलमेर में कैराकाल को रेडियो कॉलर लगाने का यह दूसरा प्रयोग बताया जा रहा है। इससे पहले भी एक कैराकाल की गतिविधियों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर का इस्तेमाल किया गया था। नए प्रयोग से वन्यजीव विशेषज्ञों को इस दुर्लभ प्रजाति के बारे में और अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद है।

जैसलमेर का मरुस्थलीय और झाड़ीदार इलाका कैराकाल सहित कई वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास माना जाता है। ऐसे में वैज्ञानिक निगरानी के जरिए इस प्रजाति की मौजूदगी और उसके प्राकृतिक व्यवहार से संबंधित आंकड़े जुटाना संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

मादा कैराकाल को जंगल में छोड़े जाने के बाद अब उसकी गतिविधियों की निगरानी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में रेडियो कॉलर से मिलने वाले आंकड़ों से उसके विचरण क्षेत्र और व्यवहार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।