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जैसलमेर सभापति चुनाव में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, 2 निर्दलीयों ने नाम वापस लिया; निर्मल पुरोहित और विजय डांगरा में मुकाबला

 
जैसलमेर सभापति चुनाव में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, 2 निर्दलीयों ने नाम वापस लिया; निर्मल पुरोहित और विजय डांगरा में मुकाबला

जैसलमेर नगर परिषद के सभापति पद के चुनाव को लेकर तस्वीर अब साफ हो गई है। नामांकन वापसी के आखिरी दिन दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद सभापति पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रह गया है। अब भाजपा की ओर से निर्मल पुरोहित और कांग्रेस की ओर से विजय डांगरा चुनाव मैदान में हैं।

दो निर्दलीयों ने वापस लिया नाम

सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन वापसी की प्रक्रिया के दौरान अपने नाम वापस ले लिए। दोनों के मैदान से हटने के बाद चुनावी मुकाबला दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के बीच सिमट गया है।

नामांकन वापसी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशी के समर्थन में पार्षदों को एकजुट करने की कवायद तेज कर दी है। दोनों दलों की नजर नगर परिषद के पार्षदों के समर्थन पर है।

निर्मल पुरोहित और विजय डांगरा आमने-सामने

सभापति पद के लिए भाजपा ने निर्मल पुरोहित को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से विजय डांगरा प्रत्याशी हैं। दोनों के बीच अब सीधा मुकाबला होगा।

नामांकन वापसी के बाद चुनावी तस्वीर स्पष्ट होने से राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। दोनों दल अपने पक्ष में अधिक से अधिक पार्षदों का समर्थन जुटाने में लगे हैं।

एक-एक वोट हो सकता है महत्वपूर्ण

सभापति चुनाव में एक-एक पार्षद का वोट महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पार्षदों को साथ रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मतदान से पहले पार्षदों के समर्थन को लेकर बैठकों और संपर्क का दौर तेज होने की संभावना है।

दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नाम वापस लेने के बाद अब चुनाव का पूरा फोकस भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों पर आ गया है।

मतदान से तय होगा सभापति

अब सभापति पद का अंतिम फैसला मतदान के जरिए होगा। निर्मल पुरोहित और विजय डांगरा के बीच होने वाले मुकाबले में किसे कितने पार्षदों का समर्थन मिलता है, इससे परिणाम तय होगा।

नामांकन वापसी के बाद जैसलमेर नगर परिषद का सभापति चुनाव अब सीधे भाजपा बनाम कांग्रेस मुकाबले में बदल गया है। दोनों दलों के लिए मतदान से पहले अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखना महत्वपूर्ण होगा।