जैसलमेर के बाद भरतपुर में बर्ड फ्लू ने बढ़ाई दहशत, देखें वायरल वीडियो

100 अन्य पक्षियों के सैंपल भी भोपाल लैब भेजे
डीएफओ मानस सिंह ने बताया- इन 2 पक्षियों के अलावा 100 अन्य पक्षियों के सैंपल भी भोपाल लैब भेजे हुए हैं। उनकी रिपोर्ट आने के बाद पता लगेगा कि बर्ड फ्लू फैला है अथवा नहीं। अभी तक सिर्फ पेंटेड स्टार्क के बच्चों में लक्षण देखने को मिले हैं। जहां ये पेंटेड स्टार्क पक्षी रहते हैं, वहीं पर दूसरे विदेशी पक्षी भी माइग्रेट कर रहे हैं। फिलहाल उनमें बर्ड फ्लू के लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं।केंद्र सरकार की तरफ से एडवाइजरी को फॉलो किया जा रहा है। किसी भी मृत पक्षी को नहीं छूने के निर्देश जारी किए हैं। रोजाना 2 से 3 बार जंगल का मुआयना किया जाता है। अगर किसी पक्षी की डेड बॉडी मिलती है, तो उसे नियमानुसार डिस्पोजल करते हैं। स्थिति पर पूरी नजर है और बचाव कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
दिसंबर 2024 में राज्य सरकार ने जारी किया था अलर्ट
दिसंबर 2024 में फलोदी जिले में बर्ड फ्लू फैलने के बाद राज्य सरकार ने अलर्ट जारी किया था। 2024 में केवलादेव घना पक्षी विहार के 6 ब्लॉक में पक्षियों की बीट के सैंपल जांच के लिए पशुपालन विभाग ने कलेक्ट किए थे। जनवरी के दूसरे सप्ताह में जैसलमेर में बड़ी संख्या में कुरजां पक्षी मृत मिले थे, जिनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी।
क्या होता है बर्ड फ्लू?
बर्ड फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। यह आमतौर पर पक्षियों और जानवरों में फैलता है। कई बार यह संक्रमण जानवरों के जरिए इंसानों में भी फैल सकता है। बर्ड फ्लू के कई वेरिएंट काफी घातक होते हैं। हालांकि, H9N2 के मामले में बहुत गंभीर समस्याएं देखने को नहीं मिली है।इन्फ्लूएंजा वायरस 4 तरह का होता है, इन्फ्लूएंजा A, B, C और D। इनमें से ज्यादातर एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। हालांकि A (H5N1) और A (H7N9) से इंसानों के संक्रमित होने का खतरा रहता है। अब A (H9N2) नए खतरे के रूप में सामने आया है।
बर्ड फ्लू के लक्षण क्या?
बर्ड फ्लू सबसे अधिक रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभवित करता है। इसके लक्षण किस तरह नजर आते हैं, आइए ग्राफिक में देखते हैं-
बर्ड फ्लू कैसे फैलता है?
बर्ड फ्लू पक्षियों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस के जरिए फैलता है। अभी तक इंसानों में इसके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के मामले सामने नहीं आए हैं। फिर भी एक्सपर्ट को डर है कि कभी भी कोई ऐसा म्यूटेंट आ सकता है, जो इंसानों से इंसानों में फैल सकता है।
बर्ड फ्लू कितनी खतरनाक बीमारी है?
साल 1997 में हॉन्गकॉन्ग में एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का इंसानों में पहला केस मिला था। यह H5N1 था और इसका डेथ रेट करीब 60% था यानी इससे प्रभावित 10 में से 6 लोगों की मौत हो रही थी।क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, बर्ड फ्लू अब तक की बेहद घातक बीमारियों में से एक है। दुनिया में इसका डेथ रेट 50% से ज्यादा है। इसका मतलब है कि बर्ड फ्लू से पीड़ित 10 लोगों में से 5 की मौत हो जाती है।बर्ड फ्लू के जिस नए वेरिएंट H9N2 को लेकर हम बात कर रहे हैं, इसकी पक्षियों में मृत्यु दर 65% के करीब है। इंसानों में अभी इसके बहुत मामले देखने को नहीं मिले हैं। जो मामले मिले हैं, उनमें यह ज्यादा घातक साबित नहीं हुआ है।
क्या है बर्ड फ्लू के रिस्क फैक्टर्स?
इन्फ्लूएंजा वायरस कई दिनों तक जीवित रह सकता है। H9N2 से संक्रमित पक्षी 10 दिनों तक मल और लार के जरिए वायरस फैला सकते हैं। इन्फेक्टेड सरफेस को छूने से भी संक्रमण फैल सकता है।