Aapka Rajasthan

Jaipur विश्व दिव्यांग दिवस आज, जज्बे से हारी परेशानियां, फिर सफलता लगी हाथ

 
Jaipur विश्व दिव्यांग दिवस आज, जज्बे से हारी परेशानियां,  फिर सफलता लगी हाथ
जयपुर न्यूज़ डेस्क, जयपुर  दिव्यांगता के कारण अधिकतर लोग अपने सपनों के आगे हार मान लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते है जो अपनी इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मुश्किल को पार कर दिखाते हैं। यह साबित कर दिखाया है मानसरोवर निवासी अक्षय भटनागर ने, जो ऑटिज्म से प्रभावित हैं। लेकिन, इसके बावजूद उन्होंने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया और आज सचिवालय में सीनियर क्लर्क के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

दो साल की उम्र के बाद परिवार के लिए संघर्ष हुआ शुरू...

अक्षय के संघर्ष को लेकर उनकी मां प्रतिभा भटनागर ने बताया कि अक्षय जब महज दो साल का था, तब महसूस हुआ कि उसका व्यवहार सामान्य बच्चों से अलग है, वह दूसरे बच्चों के साथ रहने में कतराता था। इसी दौरान जब डॉक्टर को दिखाया तो मां-बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई और पता चला कि अक्षय के समाज से घुलने-मिलने और व्यवहार में कुछ चुनौतियां हैं, यह ऑटिज्म है। इसी के साथ पूरे परिवार के लिए संघर्ष शुरू हो गया। अक्षय को स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान काफी समस्याएं और रूकावटें आई। कई बार तो उनकी मां को सिस्टम से परेशान होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जहां से उन्हें हमेशा राहत मिली।

काबिलियत को पहचानने की जरूरत

अक्षय ऑटिस्टिक है, यह जानने के बाद उनकी मां ने सरकारी नौकरी छोड़ दी और बेटे की परवरिश पर ध्यान दिया। इसके बाद अक्षय को स्पीच थेरिपी दी गई। प्रतिभा ने बताया कि ऑटिज्म को लेकर समाज में जागरूकता कम है। ऐसे में इन बच्चों को मानसिक विकलांग माना जाता है। लेकिन इन बच्चों की काबिलियत पहचानने की जरूरत है, अक्षय ने पढ़ाई और सरकारी नौकरी के साथ स्पोर्ट्स में भी कई राज्य, राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल हासिल किए हैं।

प्रत्येक कदम पर मुश्किलों का सामना

प्रतिभा भटनागर ने बताया कि अक्षय की सरकारी नौकरी के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बताया कि सरकार ने ऑटिज्म श्रेणी के दिव्यांगों के लिए आरक्षण तो दे दिया। लेकिन, नौकरी के लिए आवेदन करने के साथ ही प्रत्येक कदम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आखिर कोर्ट में इन्हें ऑटिज्म श्रेणी में आवेदन करने के लिए याचिकाएं दायर करनी पड़ी। बकायदा प्रतियोगी परीक्षा मेें बैठकर अक्षय ने ऑटिज्म दिव्यांग कोटे से क्लर्क की नौकरी हासिल की।