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जयपुर में महिला डॉक्टर का आरोप: पति बेहोशी की दवा देकर बनाता था अश्लील वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर खरीदी फॉर्च्यूनर

जयपुर में महिला डॉक्टर का आरोप: पति बेहोशी की दवा देकर बनाता था अश्लील वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर खरीदी फॉर्च्यूनर
 
जयपुर में महिला डॉक्टर का आरोप: पति बेहोशी की दवा देकर बनाता था अश्लील वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर खरीदी फॉर्च्यूनर

जयपुर में एक महिला डॉक्टर ने अपने एनेस्थेसियोलॉजिस्ट पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि पति उसे बेहोशी की दवा देकर उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो बना लेता था। इसके बाद उन वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करता था। पीड़िता का आरोप है कि पति ने इसी तरह दबाव बनाकर उससे महंगी कार फॉर्च्यूनर भी खरीदवाई।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही पति का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं था। वह किसी न किसी बहाने से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। पीड़िता का कहना है कि पति ने अपने पेशे से जुड़ी जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए उसे बेहोश किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो रिकॉर्ड किए।

महिला डॉक्टर ने शिकायत में बताया कि जब उसने पति की हरकतों का विरोध किया तो आरोपी ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। पति कथित तौर पर कहता था कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर देगा। इस डर के कारण वह लंबे समय तक मानसिक तनाव में रही।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी पति ने ब्लैकमेलिंग के जरिए उससे आर्थिक लाभ भी उठाया। उसने दबाव बनाकर फॉर्च्यूनर कार खरीदने के लिए मजबूर किया। महिला डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि लगातार धमकियों और प्रताड़ना से परेशान होकर उसने आखिरकार शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

घटना ने डॉक्टर दंपती के बीच रिश्तों में विश्वास और निजी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की निजी तस्वीरों या वीडियो का गलत इस्तेमाल गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में पीड़ित को तुरंत कानूनी सहायता लेनी चाहिए।