चूरू में महिला कॉन्स्टेबल के साथ सामूहिक दुष्कर्म, एसएचओ रोज करता था रेप, चार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर
राजस्थान के चूरू जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक महिला कॉन्स्टेबल ने तत्कालीन थाना प्रभारी (एसएचओ) समेत चार पुलिसकर्मियों पर वर्षों तक गैंगरेप करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2017 से 2025 तक उसे डराया-धमकाया गया, नशीला पदार्थ पिलाया गया और बार-बार उसके साथ दुष्कर्म किया गया। मामले की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद बुधवार को सिद्धमुख थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पीड़िता महिला कॉन्स्टेबल ने करीब दो सप्ताह पहले चूरू के पुलिस अधीक्षक जय यादव को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में उसने बताया कि ड्यूटी के दौरान और बाद में उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। एसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जांच सौंपी। जांच के दौरान पीड़िता के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियों के आधार पर आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
एफआईआर दर्ज होने के बाद बुधवार को ही महिला कॉन्स्टेबल का मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। पीड़िता के बयान को न्यायिक प्रक्रिया के तहत दर्ज कराया जाएगा, ताकि मामले को मजबूती से अदालत में प्रस्तुत किया जा सके।
महिला कॉन्स्टेबल ने अपने आरोपों में कहा है कि तत्कालीन एसएचओ उसे लगातार प्रताड़ित करता था। उसने आरोप लगाया कि एसएचओ रोजाना उसे अपने सरकारी क्वार्टर पर बुलाता था और वहां उसके साथ दुष्कर्म करता था। पीड़िता के अनुसार, जब उसने विरोध करने की कोशिश की तो उसे नौकरी से निकालने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। इसी डर के चलते वह लंबे समय तक चुप रही।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि एसएचओ के अलावा चार अन्य पुलिसकर्मियों ने भी अलग-अलग मौकों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि कई बार उसे नशीला पदार्थ पिलाया गया, जिससे वह विरोध करने की स्थिति में नहीं रहती थी। पीड़िता का कहना है कि वह लगातार मानसिक दबाव और भय में जी रही थी, लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत की।
मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग के भीतर महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर कर दिया है। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कार्रवाई की जा सकती है।
