पत्नी की सैलरी ATM से निकालना पति को पड़ा भारी: हाईकोर्ट बोला- मानसिक क्रूरता, RTI से निजी जानकारी लेना भी गलत; तलाक बरकरार
हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी की इच्छा के बिना उसके बैंक खाते से ATM के जरिए जबरन सैलरी निकालना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी की निजी जानकारी हासिल करने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) कानून का दुरुपयोग करना भी गलत है। कोर्ट ने इन परिस्थितियों को वैवाहिक जीवन में मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा मानते हुए पति-पत्नी के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है।
अदालत के इस फैसले को वैवाहिक संबंधों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आर्थिक अधिकार और निजता के महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। कोर्ट ने माना कि शादी के बाद भी पति और पत्नी दोनों की अपनी स्वतंत्र पहचान और व्यक्तिगत अधिकार होते हैं। किसी एक पक्ष को दूसरे की कमाई या निजी जानकारी पर जबरन नियंत्रण करने का अधिकार नहीं है।
पत्नी की सैलरी निकालने को माना मानसिक क्रूरता
मामले में सामने आया कि पति अपनी पत्नी की सैलरी उसके बैंक खाते से ATM के जरिए निकाल लेता था। पत्नी की इच्छा और सहमति के बिना उसकी कमाई पर इस तरह नियंत्रण करने को अदालत ने गंभीरता से लिया।
RTI के जरिए निजी जानकारी जुटाने पर भी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने मामले में पत्नी की निजी जानकारी हासिल करने के लिए RTI का इस्तेमाल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून का उद्देश्य सार्वजनिक प्राधिकरणों के कामकाज में पारदर्शिता लाना है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को परेशान करने या उसकी निजी जानकारी जुटाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
निजता का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। किसी वैवाहिक विवाद में दूसरे पक्ष की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का अनुचित इस्तेमाल करना भी मानसिक दबाव का कारण बन सकता है।
तलाक का फैसला रखा बरकरार
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों से जुड़े तथ्यों और दोनों पक्षों के व्यवहार पर विचार किया। अदालत ने पत्नी के साथ हुए व्यवहार और निजी जीवन में हस्तक्षेप से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा।
इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने पहले दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखा। इसका मतलब है कि पति की ओर से दी गई चुनौती के बावजूद तलाक का आदेश प्रभावी रहेगा।
पति-पत्नी दोनों की आर्थिक स्वतंत्रता महत्वपूर्ण
इस फैसले से यह संदेश सामने आया है कि वैवाहिक रिश्ते में भी आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत निजता का सम्मान जरूरी है। शादी के बाद पति और पत्नी एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदार जरूर होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी को दूसरे की कमाई, बैंक खाते या निजी जानकारी पर जबरन अधिकार मिल जाता है।
