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Udaipur में वैज्ञानिकों की बड़ी खोज! लेकसिटी में मिली अरबों साल पुरानी चट्टाने, खुलेगा पृथ्वी के जन्मकाल का रहस्य

Udaipur में वैज्ञानिकों की बड़ी खोज! लेकसिटी में मिली अरबों साल पुरानी चट्टाने, खुलेगा पृथ्वी के जन्मकाल का रहस्य
 
Udaipur में वैज्ञानिकों की बड़ी खोज! लेकसिटी में मिली अरबों साल पुरानी चट्टाने, खुलेगा पृथ्वी के जन्मकाल का रहस्य

अरावली पर्वत श्रृंखला की चट्टानें, जो अरबों साल पुरानी हैं, पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में रहस्य रखती हैं। उदयपुर के इसवाल क्षेत्र में खोजी गई इन चट्टानों ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग के डॉ. रितेश पुरोहित और उनकी अंतर्राष्ट्रीय टीम ने ऐसे केमिकल सिग्नेचर खोजे हैं जो पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के बारे में नई जानकारी दे सकते हैं। इस रिसर्च ने ऊइड्स नामक सूक्ष्म कार्बोनेट स्फेर्यूल्स की उत्पत्ति के बारे में पहले से चली आ रही मान्यताओं को उलट दिया है। यह रिसर्च जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका बुलेटिन में प्रकाशित हुई है।

ऊइड्स, समुद्र तल पर बने चट्टान के छोटे, गोलाकार कण हैं, जिनके बारे में पहले माना जाता था कि वे उच्च ज्वारीय ऊर्जा या सूक्ष्मजीवों की क्रियाओं से बने हैं। लेकिन डॉ. पुरोहित और उनकी टीम का दावा है कि ये स्फेर्यूल्स केमिकल रूप से एक ऑसिलेटिंग रिएक्शन (एक प्रकार की केमिकल रिएक्शन जिसमें रिएक्टेंट्स का कंसंट्रेशन समय के साथ नियमित रूप से बदलता रहता है) नामक प्रक्रिया के माध्यम से बनते हैं। यह एक एबायोटिक केमिकल रिएक्शन है जिसमें ऑर्गेनिक मैटर के सड़ने से एनर्जी बनती है, जिसमें जीवन शामिल नहीं होता, और इससे सुंदर और एक जैसी लेयर वाली स्फेर्यूल्स बनती हैं।

इसवाल और घसियार ग्लोबल जियोलॉजिकल मैप पर उभरे
रिसर्च में, टीम ने ऑस्ट्रेलिया में शार्क बे से लेकर कनाडा, चीन और भारत तक नौ जियोलॉजिकल साइट्स से सैंपल इकट्ठा किए। इनमें उदयपुर के इसवाल और घसियार इलाकों की चट्टानें शामिल थीं। यहां पाए गए डोलोमिटिक ओओइड्स लगभग दो अरब साल पुराने हैं। माइक्रोस्कोपिक एनालिसिस और रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी से पता चला कि इन स्फेर्यूल्स में आयरन, कार्बन और सल्फर के बहुत कम निशान हैं, जो दिखाता है कि उनका स्ट्रक्चर केमिकली डेवलप हुआ है, न कि सिर्फ बायोलॉजिकल या फिजिकल फ्रिक्शन से। जियोलॉजिस्ट पुरोहित का कहना है कि ऐसी चट्टानों को जियो-हेरिटेज साइट्स के तौर पर बचाकर रखना चाहिए।

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत पर एक नया नज़रिया
डॉ. पुरोहित के अनुसार, इस खोज से पता चलता है कि पृथ्वी के शुरुआती दिनों में जीवन और केमिकल प्रोसेस आपस में गहराई से जुड़े हुए थे। कई बार, जिन्हें फॉसिल या जीवन के निशान माना जाता है, वे असल में एबियोटिक केमिकल रिएक्शन का नतीजा हो सकते हैं। यह स्टडी न सिर्फ़ पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत को समझने का एक नया नज़रिया देती है, बल्कि मंगल और दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना को भी जांचने में मदद करेगी। उदयपुर के रिटायर्ड प्रोफेसर ए. वी. रॉय, प्रोफेसर हर्ष भू, और डॉ. के. के. शर्मा ने भी इस रिसर्च में अहम योगदान दिया।