धौलपुर के सरमथुरा में बुद्ध पूर्णिमा पर वन्यजीव गणना, मचान बनाकर रातभर चला सर्वेक्षण अभियान
बुद्ध पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में वन विभाग ने एक विशेष अभियान के तहत डीकेटीआर अभ्यारण्य में वन्यजीवों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। यह गणना शुक्रवार शाम 5 बजे से शनिवार शाम 5 बजे तक चली, जिसमें वन विभाग के कर्मियों, अधिकारियों, वाइल्डलाइफ प्रेमियों और स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
वन्यजीवों की सटीक संख्या का आकलन करने के उद्देश्य से अभ्यारण्य के 10 प्रमुख जलस्रोतों के पास पेड़ों पर मचान (हाई प्लेटफॉर्म) बनाए गए। इन्हीं स्थानों से वनकर्मियों ने रातभर जागकर और चांदनी रोशनी का सहारा लेकर वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी। यह विधि पारंपरिक होने के साथ-साथ वन्यजीवों को बिना बाधित किए उनकी गणना करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।
अभ्यारण्य क्षेत्र में हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर, लकड़बग्घा और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को दर्ज किया गया। वनकर्मियों ने प्रत्येक जलस्रोत पर आने वाले जानवरों की संख्या और प्रजातियों का सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड तैयार किया। यह पूरी प्रक्रिया वन विभाग की निगरानी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा की रात को इस प्रकार की गणना करना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की रोशनी पर्याप्त होती है और वन्यजीव अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। इससे उनकी वास्तविक संख्या और व्यवहार का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
हालांकि शनिवार को मौसम में अचानक परिवर्तन आने से विभागीय कार्मिकों ने राहत की सांस ली, क्योंकि गणना के दौरान किसी प्रकार की बाधा या सुरक्षा समस्या सामने नहीं आई। पूरे अभियान को सफल और सुरक्षित बताया गया है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि गणना पूरी हो चुकी है, लेकिन विस्तृत आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही अभ्यारण्य में वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक खुलासा किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की वन्यजीव गणना न केवल जैव विविधता के संरक्षण में मदद करती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि जंगलों में जानवरों की संख्या और उनके आवास की स्थिति का सही मूल्यांकन हो सके। इससे भविष्य में संरक्षण नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर भी इस अभियान को लेकर उत्साह देखा गया और लोगों ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना की। अब सभी की नजरें जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर टिकी हैं, जो अभ्यारण्य की वन्य संपदा की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे।
