पत्नी ने दोस्त के लिए रखा करवा चौथ का व्रत, पति से संबंध बनाने से भी किया इनकार; कोर्ट ने मानसिक क्रूरता मानकर खत्म की 13 साल पुरानी शादी
राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पत्नी की ओर से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने और आत्महत्या की धमकियां देने के व्यवहार को मानसिक क्रूरता माना है। अदालत ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। हालांकि, इस मामले में करवा चौथ पर दोस्त के लिए व्रत रखने और मेहंदी लगाने जैसे दावों की पुष्टि उपलब्ध अदालती रिपोर्ट से नहीं होती है।
मामला वर्ष 2018 में शादी के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। LiveLaw और Verdictum की रिपोर्ट के मुताबिक, पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी ने उसके साथ रहने और शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया। दोनों अक्टूबर 2018 से अलग रह रहे थे। पति ने तलाक की याचिका में मानसिक क्रूरता और अलग रहने को आधार बनाया था।
लंबे समय तक शारीरिक संबंध नहीं बनाने का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, पति का कहना था कि पत्नी ने बिना किसी शारीरिक अक्षमता या वैध कारण के लंबे समय तक वैवाहिक संबंध बनाने से इनकार किया। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे आत्महत्या करने की धमकी देती थी। पत्नी ने इसके विपरीत पति पर पैसों को लेकर दबाव बनाने और झगड़ा करने जैसे आरोप लगाए थे।
फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली थी। इसके खिलाफ पत्नी ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद तलाक के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि लंबे समय तक बिना उचित कारण शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और आत्महत्या की धमकियां देना संबंधित परिस्थितियों में मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है। कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक के आधार पर विचार करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना।
हाईकोर्ट ने पत्नी की तलाक के फैसले के खिलाफ अपील खारिज कर दी। वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए पत्नी की ओर से दायर याचिका को खारिज किए जाने के खिलाफ अपील भी स्वीकार नहीं की गई।
करवा चौथ को लेकर कानूनी स्थिति
यह ध्यान रखना जरूरी है कि करवा चौथ का व्रत रखना या न रखना अपने आप में तलाक या मानसिक क्रूरता का आधार नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में एक अलग मामले में स्पष्ट किया था कि व्रत रखना व्यक्तिगत पसंद है। उस मामले में अदालत ने पत्नी के समग्र व्यवहार और वैवाहिक रिश्ते को लगातार नकारने से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखा था
