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क्यों पर्यटक बार-बार लौटते हैं झालाना लेपर्ड सफारी की ओर, वरल फुटेज में जाने वो खास कारण जो आपको भी यहां आने पर कर देंगे मजबूर

क्यों पर्यटक बार-बार लौटते हैं झालाना लेपर्ड सफारी की ओर, वरल फुटेज में जाने वो खास कारण जो आपको भी यहां आने पर कर देंगे मजबूर
 
क्यों पर्यटक बार-बार लौटते हैं झालाना लेपर्ड सफारी की ओर, वरल फुटेज में जाने वो खास कारण जो आपको भी यहां आने पर कर देंगे मजबूर

राजस्थान की राजधानी जयपुर सिर्फ़ अपने किलों, महलों और हवेलियों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहाँ की झालाना लेपर्ड सफारी भी देश-दुनिया के सैलानियों के बीच एक अलग ही पहचान रखती है। बीते कुछ सालों में यह जगह जयपुर टूरिज़्म का अहम हिस्सा बन चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले पर्यटक अक्सर एक बार नहीं बल्कि बार-बार लौटकर आते हैं। आखिर ऐसा क्या है जो झालाना लेपर्ड सफारी को इतना खास बनाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे राज।

1. शहर के बीच जंगल का अनोखा अनुभव

आमतौर पर सफारी का नाम सुनते ही दिमाग में दूर-दराज़ के जंगल और नेशनल पार्क आते हैं, लेकिन झालाना सफारी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह जयपुर शहर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। यानी यहां पर्यटक बिना लंबा सफर किए जंगल का असली रोमांच अनुभव कर सकते हैं। यही वजह है कि पर्यटक अक्सर अपने छोटे-छोटे वीकेंड ट्रिप्स में भी इसे शामिल कर लेते हैं।

2. लेपर्ड देखने का दुर्लभ मौका

भारत में बाघ और हाथी सफारी तो कई जगह होती है, लेकिन लेपर्ड सफारी का अनुभव बहुत ही कम जगहों पर मिलता है। झालाना में लगभग 30 से ज्यादा तेंदुए निवास करते हैं। यहां का इलाका ऐसा है कि लेपर्ड अक्सर आसानी से दिखाई भी देते हैं। सैलानी जब खुले जंगल में तेंदुए को शिकार करते या आराम फरमाते देखते हैं तो उनके लिए यह जीवनभर की याद बन जाती है। यही रोमांच उन्हें दोबारा यहां खींच लाता है।

3. बर्ड वॉचर्स के लिए स्वर्ग

झालाना सिर्फ तेंदुओं के लिए ही नहीं बल्कि पक्षियों की अद्भुत प्रजातियों के लिए भी मशहूर है। यहां लगभग 150 से अधिक बर्ड स्पीशीज़ पाई जाती हैं। फ्लेमिंगो, इंडियन पिट्टा, हॉर्नबिल और मोर जैसे पक्षी जब जंगल की शांति में दिखाई देते हैं, तो पर्यटकों का मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। बर्ड वॉचिंग प्रेमियों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं।

4. समृद्ध जैव विविधता

यह सफारी सिर्फ़ तेंदुओं तक सीमित नहीं है। यहां लोमड़ी, सियार, नीलगाय, जंगली सूअर और कई किस्म के हिरण भी देखे जा सकते हैं। जंगल की इस समृद्ध जैव विविधता के चलते हर बार सफारी का अनुभव अलग होता है। यही विविधता पर्यटकों को बार-बार लौटने पर मजबूर करती है।

5. रोमांच और सुरक्षा का बेहतरीन संगम

झालाना लेपर्ड सफारी में पर्यटकों को खुली जीप में जंगल की पगडंडियों पर ले जाया जाता है। रास्ते में घना जंगल, अचानक सामने से गुजरता कोई जानवर और पक्षियों की आवाज़ें रोमांच को और बढ़ा देती हैं। खास बात यह है कि यहां वन विभाग की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। यानी रोमांच तो भरपूर मिलता है लेकिन खतरे का डर नहीं।

6. फोटोग्राफी का बेहतरीन मौका

प्रकृति और वन्यजीव फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए झालाना किसी खजाने से कम नहीं। यहां सुबह और शाम के समय का नज़ारा बेहद आकर्षक होता है। लेपर्ड, हिरण और पक्षियों की तस्वीरें खींचने के लिए यहां का वातावरण एकदम अनुकूल है। यही कारण है कि देश-विदेश के कई फोटोग्राफर बार-बार यहां लौटकर आते हैं।

7. स्थानीय गाइड का अनुभव

झालाना सफारी में पर्यटकों के साथ अनुभवी गाइड चलते हैं, जो न सिर्फ जंगल के रहस्यों से परिचय कराते हैं बल्कि लेपर्ड और अन्य जानवरों की आदतों, गतिविधियों और पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में भी जानकारी देते हैं। यह जानकारी सफारी को और भी यादगार बना देती है।

8. परिवार और दोस्तों संग खास अनुभव

यहां का वातावरण परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने के लिए एकदम सही है। बच्चों को जहां जंगल के जानवर देखकर नया अनुभव मिलता है, वहीं बड़े लोग भी शहरी भाग-दौड़ से हटकर प्रकृति की गोद में सुकून का एहसास करते हैं।

9. बार-बार लौटने की वजह

हर सफारी का अनुभव अलग होता है। एक बार लेपर्ड शिकार करते दिखाई देता है, तो दूसरी बार वह पेड़ पर आराम करता नज़र आ सकता है। कभी पक्षियों का झुंड मन मोह लेता है तो कभी हिरणों की दौड़ दिल को छू जाती है। यही अनोखा और बदलता हुआ अनुभव पर्यटकों को बार-बार झालाना सफारी की ओर खींच लाता है।