खाटू श्याम भगवान आखिर क्यों कहलाते है 'बनियों के सेठ' ? वीडियो में कारण जान आप भी चौंक जाएंगे
राजस्थान में खाटू श्याम जी की ख्याति देश के साथ-साथ विदेशों में भी गूंज रही है। कहा जाता है कि खाटू श्याम जी अपने भक्तों को निराश नहीं करते। आज हम आपको बताएंगे कि खाटू श्याम जी को 'बनिया का सेठ' क्यों कहा जाता है।खाटू श्याम जी को 'बनिया का सेठ' इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनकी उदारता और मदद करने की क्षमता के लिए उन्हें दुनिया भर में पूजा जाता है। भक्तों का कहना है कि खाटू श्याम जी हमेशा हारे का सहारा बनते हैं और उनकी मदद करते हैं।
खाटू श्याम जी को उनके भक्त उदार और मददगार मानते हैं। बाबा अपने भक्तों की हर संभव मदद करते हैं और उन्हें दुखों से बाहर निकालते हैं।खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे हमेशा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ते हैं और उन्हें जीत दिलाते हैं। बाबा के करोड़ों भक्त हैं। खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे हमेशा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ते हैं और उन्हें जीत दिलाते हैं। बाबा के करोड़ों भक्त हैं।
कथाओं के अनुसार, खाटू श्याम जी की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है, जिनका नाम बर्बरीक था। बर्बरीक ने भगवान कृष्ण से यह वचन लिया था कि वह हारने वाले पक्ष की ओर से युद्ध करेगा।खाटू श्याम जी को 'तीन बाण धारी' भी कहा जाता है क्योंकि उन्हें भगवान शिव ने तीन चमत्कारी बाण दिए थे, जो किसी भी युद्ध में विजय दिला सकते थे।
खाटू श्याम जी को उनकी उदारता, सहायता करने की क्षमता और पराजितों का सहारा बनने के कारण 'बनिया का सेठ' कहा जाता है।ऐसा माना जाता है कि खुदाई के दौरान बर्बरीक का सिर मिला था, जिसके बाद खाटू के तत्कालीन शासक को स्वप्न में मंदिर निर्माण का निर्देश मिला और उसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ।
