बीकानेर में गेहूं खरीद शुरू न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, खुले बाजार में कम दामों पर बेचने को मजबूर
राजस्थान के बीकानेर जिले में रबी सीजन की फसल आने के एक महीने बाद भी सरकारी गेहूं खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक देरी और लापरवाही का सीधा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जो पहले ही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल नुकसान झेल चुके हैं।
सरकारी खरीद केंद्रों के समय पर शुरू न होने के कारण किसान अपनी मेहनत की उपज को समर्थन मूल्य पर बेचने के बजाय खुले बाजार में कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों का कहना है कि जब वे मंडियों में अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं, तो सरकारी खरीद व्यवस्था शुरू न होने की वजह से उन्हें निजी व्यापारियों के हाथों कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। इससे लागत और मेहनत की तुलना में उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
Bikaner के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का कहना है कि पहले ही मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित हुआ है और अब सरकारी खरीद में देरी ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित हो।
स्थानीय कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद में देरी से बाजार में दामों पर भी असर पड़ता है और इसका सीधा नुकसान छोटे और मध्यम किसानों को होता है। उन्होंने कहा कि समय पर खरीद व्यवस्था शुरू करना किसानों के हित में बेहद जरूरी है।
प्रशासनिक स्तर पर हालांकि तैयारियों की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर खरीद केंद्रों के संचालन में देरी से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कुल मिलाकर, बीकानेर में सरकारी गेहूं खरीद की देरी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है और अब सभी की नजरें जल्द खरीद शुरू होने पर टिकी हैं, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
