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निकाय चुनाव में सियासत के साथ दौलत का दम: BJP-कांग्रेस के 1172 उम्मीदवारों में 297 करोड़पति, वीडियो में जाने जयपुर के 97 प्रत्याशी करोड़पति

निकाय चुनाव में सियासत के साथ दौलत का दम: BJP-कांग्रेस के 1172 उम्मीदवारों में 297 करोड़पति, वीडियो में जाने जयपुर के 97 प्रत्याशी करोड़पति
 
निकाय चुनाव में सियासत के साथ दौलत का दम: BJP-कांग्रेस के 1172 उम्मीदवारों में 297 करोड़पति, वीडियो में जाने जयपुर के 97 प्रत्याशी करोड़पति

राजस्थान के निकाय चुनाव में सियासी मुकाबले के साथ उम्मीदवारों की आर्थिक हैसियत भी चर्चा में है। जयपुर, अजमेर, कोटा, अलवर, सीकर, उदयपुर और जोधपुर से चुनाव मैदान में उतरे भाजपा-कांग्रेस के 1,172 उम्मीदवारों में 297 यानी करीब 25.34% प्रत्याशी करोड़पति हैं। यानी दोनों प्रमुख दलों के हर चार में से करीब एक उम्मीदवार के पास करोड़ों की संपत्ति है।

BJP के 175, कांग्रेस के 122 उम्मीदवार करोड़पति

आंकड़ों के मुताबिक, इन 297 करोड़पति उम्मीदवारों में भाजपा के 175 और कांग्रेस के 122 प्रत्याशी शामिल हैं। इन आंकड़ों में निर्दलीय उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है।सात प्रमुख शहरों में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या के मामले में जयपुर सबसे आगे है। यहां भाजपा और कांग्रेस के कुल 97 प्रत्याशी करोड़पति हैं। इसके बाद सीकर में 47 करोड़पति उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

जयपुर में हर तीन में एक के पास करोड़ों की संपत्ति

जयपुर में पार्षद का चुनाव लड़ रहे भाजपा-कांग्रेस के 298 उम्मीदवारों में 97 करोड़पति हैं। इनमें भाजपा के 62 और कांग्रेस के 35 प्रत्याशी शामिल हैं।यानी जयपुर में चुनाव लड़ रहे इन दोनों दलों के प्रत्याशियों में करीब एक-तिहाई उम्मीदवार करोड़पति हैं। स्थानीय निकाय चुनाव में यह आंकड़ा प्रत्याशियों की आर्थिक स्थिति को लेकर खासा दिलचस्प है।

टॉप-5 में सुनील कोठारी सबसे आगे

जयपुर में भाजपा-कांग्रेस के टॉप-5 करोड़पति प्रत्याशियों की सूची में वार्ड 112 से भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी सबसे आगे हैं। घोषित जानकारी के मुताबिक, कोठारी के पास करीब 35 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है।पेशे से रत्न व्यवसायी सुनील कोठारी की संपत्ति के साथ उनकी देनदारियां भी चर्चा में हैं। उनके ऊपर करीब 4.50 करोड़ रुपए की देनदारी बताई गई है। वहीं उनकी पत्नी पर करीब 11 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है।

चुनावी मैदान में पैसे की ताकत भी मुद्दा

निकाय चुनाव में प्रत्याशियों की संपत्ति के ये आंकड़े स्थानीय राजनीति में आर्थिक हैसियत की तस्वीर भी सामने रखते हैं। हाकि करोड़पति होना चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है, लेकिन चुनाव प्रचार, संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार की आर्थिक पृष्ठभूमि जरूर चर्चा का विषय बन रही है।अब देखना होगा कि करोड़पति उम्मीदवारों की यह बड़ी संख्या मतदाताओं के बीच किस तरह का प्रभाव छोड़ती है और चुनावी नतीजों में इसका कितना असर दिखाई देता है।