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चौमूं के 50 से ज्यादा गांवों में पानी बना संकट, फ्लोराइड बढ़ने से सेहत पर खतरा

चौमूं के 50 से ज्यादा गांवों में पानी बना संकट, फ्लोराइड बढ़ने से सेहत पर खतरा
 
चौमूं के 50 से ज्यादा गांवों में पानी बना संकट, फ्लोराइड बढ़ने से सेहत पर खतरा

जयपुर जिले के चौमूं उपखंड के करीब 50 से अधिक गांव, जो कभी मीठे पानी के लिए जाने जाते थे, अब खारे पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। गिरते भूजल स्तर और बढ़ते फ्लोराइड की मात्रा ने यहां पेयजल संकट को गहरा कर दिया है।

💧 मीठे पानी से खारे पानी तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ साल पहले तक इन गांवों में आसानी से मीठा पानी उपलब्ध था। लेकिन लगातार गिरते जल स्तर और अत्यधिक दोहन के कारण अब पानी खारा हो गया है, जिससे पीने योग्य पानी मिलना मुश्किल हो गया है।

⚠️ फ्लोराइड बना सबसे बड़ा खतरा

पानी में बढ़ते फ्लोराइड स्तर ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जन्म देना शुरू कर दिया है। दांतों में दाग, हड्डियों में दर्द और फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां धीरे-धीरे लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।

🌡️ भूजल स्तर में लगातार गिरावट

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक भूजल दोहन, बारिश की कमी और जल संरक्षण के अभाव के कारण स्थिति और बिगड़ती जा रही है। कई जगहों पर पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे खारे और फ्लोराइड युक्त पानी ही उपलब्ध हो रहा है।

🏥 स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में फ्लोराइड से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक इस पानी के सेवन से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

📌 समाधान की जरूरत

ग्रामीणों ने प्रशासन से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और जल संरक्षण के ठोस उपाय करने की मांग की है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।