वीडियो में देखें OMR शीट घोटाले का पर्दाफाश, SOG की बड़ी कार्रवाई, RPSC के तकनीकी प्रमुख समेत 5 गिरफ्तार
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। एसओजी ने OMR शीट में नंबर बढ़ाकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने वाली एक संगठित गैंग का पर्दाफाश किया है। इस मामले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के तकनीकी प्रमुख समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने तीन अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में हेराफेरी कर 38 अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलवाई।
SOG की टीम ने कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों के पास से करीब 60 लाख रुपये नकद, अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संजय माथुर, प्रवीण गंगवाल, शादान खान, विनोद कुमार गौड़ और पूनम माथुर शामिल हैं। इनमें से संजय माथुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर के तत्कालीन उपनिदेशक रह चुके हैं, जबकि प्रवीण गंगवाल बोर्ड में प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत था।
जांच में सामने आया है कि संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल भर्ती परीक्षाओं की पूरी OMR शीट स्कैनिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया के प्रभारी थे। इसी पद और तकनीकी पहुंच का फायदा उठाकर दोनों ने आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों शादान खान और विनोद कुमार गौड़ के साथ मिलकर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया। इन आरोपियों ने चयन प्रक्रिया के संवेदनशील चरणों में हेराफेरी कर अपने परिचित और पैसे देने वाले अभ्यर्थियों के OMR शीट में अंक बढ़ाए।
SOG के अनुसार, यह गैंग लंबे समय से सक्रिय थी और सुनियोजित तरीके से काम कर रही थी। आरोपियों ने तीन अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को निशाना बनाया और लाखों रुपये की रिश्वत लेकर योग्य-अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराया। इस फर्जीवाड़े के जरिए 38 अभ्यर्थियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति दिलवाई गई, जिससे ईमानदार उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन हुआ।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गैंग ने फर्जीवाड़े से कमाई गई रकम को आपस में बांट लिया था और कुछ पैसा हवाला व अन्य माध्यमों से छिपाने की कोशिश की गई। SOG अब यह भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या इससे पहले भी अन्य भर्ती परीक्षाओं में इसी तरह की धांधली की गई थी।
इस खुलासे के बाद राजस्थान की भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं सरकार ने SOG की कार्रवाई को सराहनीय बताया है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भर्ती प्रणाली को और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाया जाएगा।
SOG ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ एक बड़े घोटाले को उजागर करती है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम भी मानी जा रही है।
