वीडियो में देंखे सिद्धपीठ घाटा मेहंदीपुर बालाजी में 5 दिवसीय होली महोत्सव का आगाज
उत्तर भारत के प्रसिद्ध धर्मस्थलों में से एक सिद्धपीठ घाटा मेहंदीपुर बालाजी में शनिवार से 5 दिवसीय होली महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव 4 मार्च तक चलेगा और पहले ही दिन से दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जुटना शुरू हो गई है। कस्बे में श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं।
महोत्सव का आयोजन मंदिर के महंत डॉ नरेशपुरी महाराज के सानिध्य में किया गया। इस अवसर पर स्वयंभू बालाजी महाराज का पंचामृत अभिषेक कर अलौकिक श्रृंगार किया गया और सोने का चोला चढ़ाया गया। साथ ही छप्पनभोग भी लगाया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। महोत्सव का विधिवत आरंभ मंगला आरती के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
आरती के बाद श्रद्धालुओं ने स्वयंभू बालाजी महाराज, भैरवबाबा, प्रेतराज सरकार, सीताराम दरबार, राधा-कृष्ण और समाधी वाले बाबा के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन ने बताया कि महोत्सव के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शनों के लिए घाटा मेहंदीपुर बालाजी आएंगे। इसको देखते हुए सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।
स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन, पुलिस और मंदिर प्रबंधन ने मिलकर विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन के लिए अलग-अलग मार्ग और प्रवेश निकासी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, पार्किंग और आवागमन के लिए भी विस्तृत योजना बनाई गई है।
महोत्सव में बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। श्रद्धालु भजन, कीर्तन और होली के पारंपरिक उत्सव का आनंद ले सकते हैं। मंदिर प्रशासन ने आगंतुकों से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और अपने सामान और बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
विशेषज्ञों और भक्तों का मानना है कि घाटा मेहंदीपुर बालाजी का होली महोत्सव आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति और उत्सवों की झलक भी प्रस्तुत करता है।
इस प्रकार, सिद्धपीठ घाटा मेहंदीपुर बालाजी में 5 दिवसीय होली महोत्सव ने शुक्रवार से ही श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की तैयारियों के चलते दर्शनार्थियों को सुविधा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की गई है।
