“रेगिस्तान की तपिश में मजदूरों की आवाज़: वीडियो में जाने विधायक रविंद्र भाटी का खून से लिखा पत्र पहुँचेगा अमित शाह तक”
राजस्थान के शिव (बाड़मेर) विधानसभा क्षेत्र से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने एक बेहद भावुक और चर्चित कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को तीन पन्नों का एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से मजदूरों के खून में अपना खून मिलाकर उनकी पीड़ा को उजागर किया है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब गिरल गांव में माइनिंग मजदूरों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।विधायक भाटी पिछले 5 मई से खुद भी मजदूरों के साथ धरने पर बैठे हुए हैं, जो अब 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जिस परियोजना के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दी, आज वही लोग बेरोजगारी और शोषण का शिकार बन गए हैं।
भाटी ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि मजदूरों को नौकरी से निकाला जा रहा है और उनसे 8 घंटे की बजाय 12-12 घंटे तक काम करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी में, जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां एशिया की सबसे बड़ी ओपन लिग्नाइट खदान के मजदूर पिछले 45 दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। भाटी ने दावा किया कि इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए, जिससे न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इसका जवाब दिया जाएगा और सच्चाई को सामने लाया जाएगा।
धरने पर बैठे मजदूरों के समर्थन में विधायक भाटी लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे धरना स्थल पर मौजूद रहकर श्रमिकों की मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और सम्मान का सवाल है।सूत्रों के अनुसार, 25 और 26 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीकानेर दौरे पर रहेंगे। इसी दौरान विधायक रविंद्र भाटी उन्हें यह “खून से लिखा पत्र” सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि मजदूरों की आवाज सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सके। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर मजदूर न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा अब बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
