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दौसा के कुतकपुर गांव में चारागाह की जमीन जीएसएस देने का विरोध, वीडियो में देंखे ग्रामीण 168 दिन से धरने पर

दौसा के कुतकपुर गांव में चारागाह की जमीन जीएसएस देने का विरोध, वीडियो में देंखे ग्रामीण 168 दिन से धरने पर
 
दौसा के कुतकपुर गांव में चारागाह की जमीन जीएसएस देने का विरोध, वीडियो में देंखे ग्रामीण 168 दिन से धरने पर

दौसा जिले के कुतकपुर गांव में चारागाह की जमीन जीएसएस (ग्रोस स्टेट सप्लाई) देने के विरोध में ग्रामीण लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध पिछले 168 दिनों से जारी है और आज ग्रामीण मवेशियों के साथ एसडीएम ऑफिस की ओर पैदल कूच के लिए निकले।

प्रदर्शनकारियों ने हिण्डौन रोड स्थित देवी माता मंदिर से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष सहित गोवंश, भेड़-बकरी आदि के साथ महवा कस्बे की ओर मार्च शुरू किया। रास्ते भर ग्रामीणों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि चारागाह की जमीन स्थानीय मवेशियों और पशुपालकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे जीएसएस देने का निर्णय उनका हित हानि पहुँचाने वाला है।

ग्रामीण राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महवा कस्बे की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी पैदल कूच के कारण महवा-हिण्डौन स्टेट हाइवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस स्थिति को देखते हुए महवा थाना और सलेमपुर थाना पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। मौके पर पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया और प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की।

स्थानीय लोगों ने बताया कि चारागाह की जमीन स्थानीय मवेशियों की चराई और ग्रामीणों के लिए अन्न और रोजगार का स्रोत है। अगर जमीन जीएसएस के लिए दी जाती है तो उनका आर्थिक और पारंपरिक जीवन प्रभावित होगा। यही कारण है कि ग्रामीण इतने लंबे समय से धरने पर बैठे हैं और पैदल मार्च कर विरोध जता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जमीनों का हस्तांतरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन पर सीधा असर डालता है। स्थानीय प्रशासन को इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों की सुनवाई कर समाधान निकालना आवश्यक है।

ग्रामीणों ने कहा कि उनका विरोध शांतिपूर्ण है, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन और तेज हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनके हितों और मवेशियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।

महवा और सलेमपुर थाना पुलिस ने इस मौके पर बड़ी संख्या में जवान तैनात किए और प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित की। प्रशासन ने ग्रामीणों और वाहनों के लिए अलग मार्ग तय कर ट्रैफिक की स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

इस धरने और पैदल मार्च ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के सामने ग्रामीणों की गंभीर नाराजगी को उजागर कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और इसे सुलझाने के लिए जल्द ही बातचीत शुरू की जाएगी।