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VIDEO चंबल नदी का इतिहास, राजस्थान से यूपी तक बहती है ये नदी VIDEO घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए क्यों है खास

VIDEO चंबल नदी का इतिहास, राजस्थान से यूपी तक बहती है ये नदी VIDEO घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए क्यों है खास
 
VIDEO चंबल नदी का इतिहास, राजस्थान से यूपी तक बहती है ये नदी VIDEO घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए क्यों है खास

भारत की प्रमुख नदियों में चंबल नदी का अपना अलग महत्व है। चंबल का नाम आते ही राजस्थान की गहरी बीहड़ घाटियां, साफ बहता पानी और नदी में विचरण करते घड़ियाल की तस्वीर सामने आती है। यह नदी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के भूगोल तथा पर्यावरण से गहराई से जुड़ी हुई है। चंबल नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि अपने आसपास के अनोखे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी जानी जाती है।

मध्य प्रदेश से शुरू होती है नदी की यात्रा

चंबल नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में माना जाता है। यहां से निकलने के बाद नदी मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सीमा के कई हिस्सों से गुजरती हुई आगे बढ़ती है और अंत में उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिल जाती है। चंबल का बहाव कई स्थानों पर गहरी घाटियों और बीहड़ों के बीच से गुजरता है। सदियों के प्राकृतिक कटाव से बने ये बीहड़ चंबल के भू-दृश्य की अलग पहचान बन चुके हैं।

तीन राज्यों से जुड़ा है चंबल का संरक्षण

चंबल नदी का एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अंतर्गत आता है। यह संरक्षित क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म बोर्ड के अनुसार राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और इसका एक बड़ा हिस्सा चंबल नदी के आसपास मौजूद है।

घड़ियालों के लिए महत्वपूर्ण नदी

चंबल नदी को गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियाल के महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों में गिना जाता है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की स्थापना मुख्य रूप से घड़ियाल के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार चंबल का संरक्षित क्षेत्र घड़ियालों के संरक्षण के लिए देश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। नदी में घड़ियाल के अलावा मगरमच्छ, कछुओं की कई प्रजातियां और ऊदबिलाव जैसे जलीय जीव भी पाए जाते हैं।

गंगा डॉल्फिन भी चंबल में दिखाई देती है

चंबल नदी की जैव विविधता में गंगा नदी की डॉल्फिन भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल के साथ गंगा डॉल्फिन और कई जलीय जीवों का संरक्षण किया जाता है।

चंबल के बीहड़ भी हैं खास

चंबल नदी के किनारे बने गहरे बीहड़ लंबे समय से इस क्षेत्र की पहचान रहे हैं। इन प्राकृतिक घाटियों ने नदी के आसपास एक अनोखा भौगोलिक परिदृश्य बनाया है। यही बीहड़ आज वन्यजीवों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। चंबल नदी की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक वातावरण और जैव विविधता है। नदी और उसके आसपास का क्षेत्र यह दिखाता है कि जल संरक्षण के साथ वन्यजीव संरक्षण किस तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि चंबल नदी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए केवल एक नदी नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।