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झालावाड़ में भावुक दिखीं वसुंधरा राजे, वीडियो में देखें बोलीं—राजनीति में 35 साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला

झालावाड़ में भावुक दिखीं वसुंधरा राजे, वीडियो में देखें बोलीं—राजनीति में 35 साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला
 
झालावाड़ में भावुक दिखीं वसुंधरा राजे, वीडियो में देखें बोलीं—राजनीति में 35 साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजनीति में अपने लंबे सफर को याद करते हुए भावुक और हल्के-फुल्के अंदाज में कई बातें साझा कीं। झालावाड़ में सांसद दुष्यंत सिंह की दूसरे चरण की पदयात्रा के शुभारंभ अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति करते हुए 35 साल कब बीत गए, इसका एहसास ही नहीं हुआ। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि जब वह पहली बार झालावाड़ आई थीं, तब उन्हें यह तक नहीं पता था कि झालावाड़ कहां स्थित है।

जनसभा को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि समय के साथ उनका झालावाड़ से गहरा रिश्ता बन गया है। उन्होंने कहा कि आज झालावाड़ उनके लिए सिर्फ एक संसदीय क्षेत्र नहीं, बल्कि परिवार की तरह है। राजे के इस बयान पर सभा में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

इस दौरान वसुंधरा राजे ने अपने चिर-परिचित अंदाज में मंच से हल्का-फुल्का मजाक भी किया। उन्होंने सभा में मौजूद बुजुर्गों की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमारे साथ यहां कई बुजुर्ग बैठे हुए हैं, जो एक जमाने में हमारे जैसे जवान दिखा करते थे। आज ये बुजुर्ग दिखते हैं, लेकिन सच कहूं तो हमारे में और इनमें कोई फर्क नहीं है।” वसुंधरा राजे के इस बयान पर पंडाल में मौजूद लोग ठहाके लगाकर हंसने लगे और माहौल खुशनुमा हो गया।

राजे ने आगे कहा कि राजनीति सिर्फ सत्ता का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह जनता से जुड़ने और उनके सुख-दुख में साथ खड़े होने का जरिया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों से अधिक समय में उन्होंने राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया और जनता से जो स्नेह मिला, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

जनसभा के दौरान वसुंधरा राजे ने सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की यात्राएं जनता से सीधे संवाद का सबसे बेहतर माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि पदयात्रा के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को नजदीक से समझा जा सकता है और समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आम लोग मौजूद रहे। वसुंधरा राजे के संबोधन के दौरान लोगों में उत्साह और अपनापन साफ नजर आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजे का यह बयान न सिर्फ उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है, बल्कि झालावाड़ से उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूती से सामने लाता है।

इस मौके पर मंच से दिए गए उनके आत्मीय और सहज शब्दों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि वसुंधरा राजे आज भी राजस्थान की राजनीति में एक प्रभावशाली और जनप्रिय चेहरा बनी हुई हैं।