बजट सत्र में लोकसभा में हंगामा, वीडियो में देंखे अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर विपक्ष ने पीएम मोदी पर उठाए सवाल
बजट सत्र के पांचवें दिन लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को फिर विवादों के घेरे में रही। सुबह 11 बजे शुरू हुई कार्यवाही महज आठ मिनट ही चल पाई, क्योंकि विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी सांसदों से कहा, “प्रश्नकाल के दौरान नारेबाजी का क्या मतलब है?” इसके बावजूद विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा। बढ़ते तनाव को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
हंगामे के बीच सदन में विपक्ष ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि यह डील भी वैसे ही घोषित की गई है जैसे पहले ‘सीजफायर’ या ऑपरेशन सिंदूर का मामला था। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका की ओर से की गई घोषणाओं पर निर्भर हो गए हैं और देश की आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, NDA की संसदीय दल की बैठक मंगलवार सुबह अमेरिका से भारत के लिए हुई ट्रेड डील पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री मोदी का बैठक में स्वागत किया गया और केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू ने इसे “अद्भुत और ऐतिहासिक” बताया। रिजिजू ने कहा कि यह डील दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील भारतीय निर्यातकों और उद्योगों के लिए नए अवसर खोल सकती है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के रूप में पेश करने और प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाने के रूप में देख रहा है। कांग्रेस ने इस अवसर पर आरोप लगाया कि जैसे ऑपरेशन सिंदूर में अमेरिका ने घोषणा की थी, वैसे ही ट्रेड डील की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में पर्याप्त स्वायत्तता नहीं रह गई है और वे अमेरिकी निर्णयों पर निर्भर हो गए हैं।
संसदीय सूत्रों के अनुसार, बजट सत्र में यह हंगामा अभी और बढ़ सकता है। विपक्ष ने पहले ही संकेत दे दिया है कि वे प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के विदेश नीति और व्यापार समझौतों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहेंगे। दूसरी ओर सरकार इस डील को एक बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही है और इसे आर्थिक वृद्धि एवं रोजगार सृजन से जोड़कर जनता के सामने रख रही है।
इससे पहले, बजट सत्र में कई मौकों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहसें हो चुकी हैं। पिछले दिनों भी प्रश्नकाल के दौरान नारेबाजी और हंगामा हुआ था, जिसे लेकर सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई थी। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील अब संसद में मुख्य बहस का विषय बन चुकी है और अगले कुछ दिनों में इससे जुड़ी चर्चा और भी गर्म रहने की संभावना है।
लोकसभा हंगामे और ट्रेड डील को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि बजट सत्र केवल वित्तीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सरकार की विदेश नीति पर भी केंद्रित होगा।
