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राजस्थान यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह से पहले हंगामा, पीएचडी छात्रों ने डिग्री वितरण व्यवस्था पर जताया विरोध

राजस्थान यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह से पहले हंगामा, पीएचडी छात्रों ने डिग्री वितरण व्यवस्था पर जताया विरोध
 
राजस्थान यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह से पहले हंगामा, पीएचडी छात्रों ने डिग्री वितरण व्यवस्था पर जताया विरोध

University of Rajasthan के दीक्षांत समारोह से पहले विवाद और हंगामे की स्थिति बन गई। उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ही पीएचडी छात्रों ने मंच से डिग्री नहीं दिए जाने को लेकर नाराजगी जताते हुए विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने इसे शोधार्थियों का “बड़ा अपमान” बताते हुए व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

जानकारी के अनुसार दीक्षांत समारोह को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन समारोह शुरू होने से पहले ही पीएचडी शोधार्थियों के बीच असंतोष खुलकर सामने आ गया। छात्रों का आरोप है कि पीएचडी जैसी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करने के बावजूद उन्हें मंच पर बुलाकर डिग्री नहीं देने का फैसला उनके सम्मान के खिलाफ है।

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, शोध और संघर्ष के बाद मिलने वाली पीएचडी डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि अकादमिक उपलब्धि का सम्मान है। ऐसे में मंच से डिग्री न देना शोधार्थियों की उपेक्षा है। इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने समारोह स्थल पर नाराजगी जाहिर की और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

छात्रों का कहना है कि दीक्षांत समारोह का सबसे अहम हिस्सा मंच पर डिग्री प्राप्त करना होता है और यदि शोधार्थियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है तो यह उनकी उपलब्धि को कमतर आंकने जैसा है। कई छात्रों ने इसे परंपरा और सम्मान दोनों के खिलाफ बताया।

उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम में पहुंचने से पहले इस हंगामे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी। विश्वविद्यालय प्रशासन और अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को शांत करने के लिए बातचीत की गई। सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई ताकि समारोह प्रभावित न हो।

मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल सम्मानजनक व्यवहार और मंच से डिग्री प्रदान करने की है। उनका कहना है कि यह केवल एक बैच का मुद्दा नहीं, बल्कि शोधार्थियों की गरिमा से जुड़ा विषय है।

शैक्षणिक जगत में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत का सार्वजनिक सम्मान होता है। ऐसे में किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से भी उपेक्षित महसूस नहीं होना चाहिए।

फिलहाल राजस्थान यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह इस विवाद के कारण सुर्खियों में आ गया है। उपराष्ट्रपति के आगमन से पहले खड़ा हुआ यह हंगामा अब बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। छात्रों के विरोध के बीच सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।