10 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान बंद करने का ऐलान, MDR के विरोध में डीलर्स की चेतावनी
पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले वाहन चालकों के लिए डिजिटल भुगतान को लेकर अहम खबर सामने आई है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में 10 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान बंद करने का फैसला किया है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। इस फैसले का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए फोन-पे, गूगल-पे या अन्य UPI ऐप का इस्तेमाल करते हैं।
MDR को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो कुछ डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं में व्यापारी या कारोबारियों पर लगाया जा सकता है। पेट्रोल पंप संचालकों का विरोध इसी शुल्क और डिजिटल भुगतान से जुड़ी लागत को लेकर बताया जा रहा है।
पेट्रोल पंपों पर बड़ी संख्या में ग्राहक UPI के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर लगने वाला शुल्क कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। डीलर्स एसोसिएशन का मानना है कि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि पेट्रोल पंप संचालकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
हालांकि, UPI के सभी लेनदेन पर एक समान MDR लागू नहीं होता। शुल्क की स्थिति भुगतान के माध्यम, संबंधित नियमों और लेनदेन की श्रेणी पर निर्भर करती है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि मांगें नहीं माने जाने तक विरोध जारी रहेगा। 10 अक्टूबर से UPI भुगतान बंद करने का फैसला इसी विरोध का हिस्सा बताया गया है। हालांकि, इस फैसले को किन-किन राज्यों और शहरों में लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
इसलिए ग्राहकों को अपने इलाके के पेट्रोल पंपों पर भुगतान से जुड़े निर्देशों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। केवल इस घोषणा के आधार पर यह मानना सही नहीं होगा कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान बंद हो जाएगा।
वाहन चालक रखें नकदी या दूसरा विकल्प
अगर आपके इलाके में पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान बंद रहता है, तो परेशानी से बचने के लिए वाहन चालक नकदी या उपलब्ध अन्य भुगतान विकल्प साथ रख सकते हैं। पेट्रोल भरवाने से पहले पंप पर भुगतान की सुविधा पूछ लेना भी उपयोगी रहेगा।
इस मामले में ग्राहकों की नजर अब एसोसिएशन की मांगों और संबंधित पक्षों के बीच होने वाली बातचीत पर रहेगी। मांगों पर सहमति बनने या विरोध के दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का पता चल सकेगा।
