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जयपुर में घरेलू गैस सिलेंडर का अनधिकृत इस्तेमाल, इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी

जयपुर में घरेलू गैस सिलेंडर का अनधिकृत इस्तेमाल, इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी
 
जयपुर में घरेलू गैस सिलेंडर का अनधिकृत इस्तेमाल, इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी

शहर में जयपुर में घरेलू गैस आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच होटल और ढाबों में अब भी घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जिला कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बावजूद यह जारी है। सूत्रों के अनुसार, इस कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है। वहीं, गैस कंपनियों के सर्वर ठप होने से सिलेंडर बुकिंग प्रभावित हो रही है। इससे कई जगह एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और स्थिति को लेकर उपभोक्ताओं और कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है।

घरेलू गैस सिलेंडर की कमी के बीच जयपुर शहर में कालाबाजारी और दुरुपयोग के मामले भी सामने आ रहे हैं। मिठाई की दुकानों, चाय की थड़ियों और कई होटल-ढाबों पर कॉमर्शियल सिलेंडर की जगह चोरी-छुपे घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल देखा गया है।

जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि घरेलू सिलेंडर का कॉमर्शियल उपयोग नहीं किया जाए। उन्होंने कारोबारियों को चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों और उद्योग स्रोतों का कहना है कि घरेलू सिलेंडर का अनधिकृत उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी खतरनाक है। इसके अलावा, इससे गैस की असमान वितरण प्रणाली और उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बढ़ रही है।

सिलेंडर बुकिंग में तकनीकी बाधाओं और कालाबाजारी के कारण उपभोक्ताओं को मजबूरी में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो उन्हें रसोई और संचालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

पुलिस और प्रशासन की ओर से भी बाजारों और होटल क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि घरेलू सिलेंडर का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए नियमित जांच और कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि व्यापारियों को इंडक्शन चूल्हों और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों का प्रयोग बढ़ाना चाहिए ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो और आपूर्ति प्रणाली में सुधार आए।

जयपुर में घरेलू गैस सिलेंडर का अनधिकृत इस्तेमाल और कालाबाजारी शहरवासियों और प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है। ऐसे में नियमों का पालन और जागरूकता बढ़ाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।